
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस-वोटिंग की खबरों को खारिज करते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर मुद्दों से ध्यान हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 15 वोटों की मामूली गिनती पर ध्यान देने के बजाय सरकार को उन महत्वपूर्ण आंकड़ों पर जवाब देना चाहिए, जैसे कि अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाए जाने के 15 दिन, मणिपुर में हिंसा शुरू होने के 862 दिन और पश्चिम बंगाल के लिए मनरेगा फंड रोकने के 1282 दिन।
उपराष्ट्रपति चुनाव में सीपी राधाकृष्णन ने 452 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले। बीजेपी नेताओं ने दावा किया कि राधाकृष्णन को विपक्षी खेमे से भी समर्थन मिला, जिससे उनकी जीत का अंतर अपेक्षा से अधिक रहा। विपक्ष ने दावा किया था कि उनके 315 सांसद एकजुट थे, लेकिन परिणाम उनके लिए निराशाजनक रहे।
लोकसभा में सवालों का जवाब
डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, “यह 967 दिन से जेपी नड्डा का बीजेपी अध्यक्ष के रूप में अतिरिक्त समय 2278 दिन से लोकसभा में उपसभापति की अनुपस्थिति और 4117 दिन से प्रधानमंत्री का लोकसभा में सवालों का जवाब न देना जैसे मुद्दे हैं, जिनके लिए मोदी सरकार को जवाबदेह होना चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ये आंकड़े उपराष्ट्रपति चुनाव के वोटों के अंतर से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
राधाकृष्णन के पक्ष में मतदान
बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने दावा किया कि करीब 40 विपक्षी सांसदों ने राधाकृष्णन के पक्ष में मतदान किया या अमान्य वोट डालकर एनडीए उम्मीदवार का समर्थन किया। यह बयान विपक्ष के कुछ नेताओं द्वारा सांसदों से रेड्डी के समर्थन में अंतःकरण की आवाज पर वोट देने की अपील के जवाब में देखा जा रहा है।
