
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने बिहार में 22 लाख मृत मतदाताओं के मुद्दे पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की कड़ी आलोचना की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीन मिनट के वीडियो में मोइत्रा ने सीईसी के दावों को पूरी तरह हास्यास्पद करार दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में मतदाता सूची की नियमित समीक्षा होती रही है, फिर भी ये मृत मतदाता सूची से क्यों नहीं हटाए गए।
मोइत्रा ने रविवार को सीईसी के प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए गए दो गलत दावों पर सवाल उठाए। सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि बिहार में 22 लाख मृत मतदाता पिछले छह महीनों में नहीं, बल्कि कई वर्षों में मरे हैं। इसके जवाब में मोइत्रा ने पूछा कि अगर अप्रैल 2025 तक मतदाता सूची की समीक्षा हो चुकी है, तो इन मृत मतदाताओं को क्यों नहीं हटाया गया। उन्होंने कहा, “अगर आपके कार्यकाल में मृत मतदाताओं को ठीक नहीं किया गया, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? क्या आपको लगता है कि हमारी बुद्धि भाजपा कार्यकर्ताओं जितनी है?”
विपक्ष पर वोट चोरी के आरोप
मोइत्रा ने सीईसी के उस दावे पर भी आपत्ति जताई जिसमें विपक्ष पर वोट चोरी के आरोप लगाने का इल्जाम लगाया गया था। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही हटाए गए 65 लाख मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए गए। मोइत्रा ने सवाल उठाया कि जब लोगों को इन मतदाताओं की जानकारी ही नहीं थी, तो वे दावा और आपत्ति कैसे दर्ज कर सकते थे।
भाजपा के हाथों की कठपुतली
टीएमसी सांसद ने चुनाव आयोग से झूठ और गलत सूचना फैलाने से रोकने की मांग की और आयोग पर भाजपा के हाथों की कठपुतली बनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें।
