9 दिनों से आंदोलन कर रहे किसानों ने 8 दिसंबर को किया भारत बंद का ऐलान

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। कृषि कानून (Agricultural bill) के खिलाफ किसानों का विरोध बढ़ता जा रहा है। सिंधु बॉर्डर पर डटे किसानों के विरोध का आज 9वां दिन है, इस दौरान परेशान किसानों ने मीडिया से बात करते हुए 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान किया है। वहीं 5 दिसंबर शनिवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंकने की भी बात कही है।

5 दिसंबर को फूंकेंगे पीएम मोदी का पुतला

भारतीय किसान यूनियन के महासचिव (General Secretary of Bhartiya Kisan Union) एचएस लखोवाल ने कहा, कि सरकार से कृषि बिल को वापस लेने को लेकर सरकार से दो बार चर्चा हो चुकी है, इसके बावजूद अब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। जिसे देखते हुए अब 5 दिसंबर को देशभर में पीएम मोदी के पुतले जलाए जाएंगे और 8 दिसंबर को भारत बंद करने का ऐलान किया है।

9 दिन से डटे है किसान

बड़ी संख्या में किसान 9 दिन से लगातार किसान कृषि बिल को वापस लेने की मांग करते हुए सिंधु बॉर्डर पर डटे हुए है। प्रेस वार्ता के दौरान अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव (General Secretary of All India Kisan Mahasabha) हन्नान मोल्लाह ने बताया कि इस आंदोलन को हमें आगे बढ़ाना होगा और केंद्र सरकार की ओर से किसी भी तरह का कोई संशोधन नहीं माना जाएगा। बता दें कि केंद्र सरकार की दो बार किसानों से चर्चा हो चुकी है, इसी कड़ी में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल समेत कई केंद्रीय अधिकारियों के साथ किसान नेताओं ने बैठक की है। जिसमें कृषि मंत्री ने आश्वस्त किया था कि किसानों की कई मांगों को सुना गया है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं किया गया है।

चुनाव के समय नहीं उठाया गया था मुद्दा

चुनाव के समय भी किसानों के इस मुद्दे को नहीं उठाया गया था। वहीं राजद और वाम नेताओं का समर्थन राजनीतिक पार्टियों ने कृषि बिल को लेकर अपना निर्णय साफ नहीं किया है। इसके साथ ही राजद ने कृषि बिल को चुनाव प्रचार के समय माइग्रेशन और बेरोजगारी से जोड़ते हुए इस ओर ध्यान नहीं दिया।

2006 में APMC एक्ट को खत्म कर दिया गया था

राजद नेता तेजस्वी ने बताया कि साल 2006 में APMC एक्ट को खत्म कर दिया गया था और किसानों को सही मेहनताना नहीं मिल रहा था। जिसके कारण किसान यहां से चले गए थे। 17 सितंबर विधेयक पारित हुआ था, जिसके बाद देश के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि इससे किसानों को अपनी उपज बेचने की आजादी होगी, साथ ही वह अपनी मर्जी का मालिक रहेगा। जिसके बाद अब किसान इसका विरोध कर आंदोलन कर रहे है।

सरकार नहीं लेना चाहती किसान बिल वापस

वहीं किसान MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) को लेकर एक संतोषजनक भरोसा की चाह कर रहे है। बता दें कि सरकार किसान बिल वापस लेने की बात को स्वीकार नहीं कर रही है, लेकिन कुछ मांगों पर विचार करने की बात जरूर कर रही है। वहीं अब इस आंदोलन को विपक्ष पार्टियों का समर्थन मिल रहा है, जिसे लेकर पीएम मोदी ने कहा कि विपक्षी पार्टी किसानों को भड़काने और गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।

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