ट्रक चालक की गोली मारकर हत्या, मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

ट्रक चालक की गोली मारकर हत्या, मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

जबलपुर, संदीप कुमार। जबलपुर के पावला गांव में ट्रक चालक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। ट्रक चालक का नाम धनीराम बताया जा रहा है। इधर सूचना मिलते ही बेलखेड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश में जुट गई।

सड़क पर लकड़ी रखकर रोका गया था ट्रक

बताया जा रहा है कि ट्रक चालक धनीराम जब ट्रक लेकर जबलपुर तरफ आ रहा था, उसी दौरान पावला गांव के पास सड़क पर उसे लकड़ी रखी दिखी, जिसे हटाने के लिए जैसे ही वह ट्रक से उतर कर सड़क पर गया तभी अज्ञात आरोपी जो कि पहले से घात लगाकर वहां बैठे हुए थे, उन्होंने उसे गोली मार दी।धनीराम काफी देर तक घायल हालत में सड़क पर तड़पता रहा। इस दौरान कुछ स्थानीय लोगों को धनीराम घायल दिखा तो वह तुरंत ही उसे मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां उसको डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।

अवैध रेत खनन का ठिकाना है पावला गांव

जानकारी के मुताबिक बेलखेड़ा थाने का पावला गांव अवैध रेत खनन का एक बड़ा ठिकाना है, इस गांव से लगी नर्मदा नदी से रोजाना ही कई डंपर अवैध रेत भरकर सप्लाई करते हैं। कहा जा रहा है कि धनीराम की हत्या भी संभवत अवैध रेत खनन को लेकर की गई है, इधर धनीराम जिसका ट्रक चलाया करता था उसके मालिक और मुंशी पर भी पुलिस ने संदेह जताया है। फिलहाल बेलखेड़ा थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपी पर हत्या का मामला दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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