पन्ना में बाघों की लगातार हो रही मौतों की जांच जरूरी, सिर कटे मिल रहे हैं बाघ के अवशेष

पन्ना में बाघों की लगातार हो रही मौतों की जांच जरूरी, सिर कटे मिल रहे हैं बाघ के अवशेष

पन्ना,नीलू शर्मा| पन्ना टाइगर रिज़र्व (Panna Tiger reserve) ने बाघ पुनर्स्थापना में ऐतिहासिक मुकाम कायम किया है । 2009 में बाघ विहीन हो चुके पन्ना में सफलता पूर्वक न केवल बाघ (Tiger) बसाये गए बल्कि उनकी संख्या 50 को पार कर गई थी ।

लेकिन पिछले कुछ महीनों में तेंदुओं के साथ ही बाघो की अप्रकृतिक मौतें हुई हैं जो संदेहास्पद हैं लेकिन उन पर पार्क प्रवंधन लीपा-पोती करता रहा है । किसी भी घटना की उच्च-स्तरीय जांच नही हुई इसी बीच एक सिर कटा बाघ मिला जिसके लिए मगरमच्छ द्वारा खाने की कहानी बनाई गई । जबकि कहानी प्रथम दृष्टि में ही विश्वास करने के लायक प्रतीत नही होती । पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का हर घटना में एक ही राग का अलापना होता है कि आपसी संघर्ष में ये मौतें हो रही हैं
जिसकी उच्च-स्तरीय जांच जरूरी है। पन्ना के बाघों की लगातार हो रही मौतों को रोकने व बाघ की मौत के सौदागरों का माकूल सजा मिल सके इसके लिए सभी का प्रयास करना भी जरूरी है ।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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