राजगढ़ में पीडीएस का 510 क्विंटल सरकारी चावल पकड़ाया, गुजरात भेजने की थी तैयारी

राजगढ़ में पीडीएस का 510 क्विंटल सरकारी चावल पकड़ाया, गुजरात भेजने की थी तैयारी

राजगढ़, डेस्क रिपोर्ट| मध्यप्रदेश (MadhyaPradesh) के राजगढ़ (Rajgarh) में दो वेयर हाउस से पीडीएस का 510 क्विंटल चावल पकड़ाया है| प्रशासन ने सूचना के बाद पहुच कर दोनो वेयर हाउस को सील कर दिया है । बताया जा रहा है कि वेयर हाउस से गरीबों का चावल, ट्रक में भर कर गुजरात (Gujrat) पहुंचाया जा रहा था, लेकिन ट्रक में लोड होते समय पकड़ा गया ।

जिले में गरीबों को सस्ती कीमतों पर दिया जाने वाला चावल.ब्यावरा के निजी वेयर हाउस से चोरी-छिपे ट्रक में भरकर गुजरात बेचने ले जाया जा रहा था। तभी प्रशासन को इसकी सूचना मिली और अपर कलेक्टर कमल नागर ने मौके पर पहुच कर बड़ी मात्रा में सरकारी चावल जप्त करते हुए. वेयर हाउस को सील कर दिया है । बताया जा रहा है कि ब्यावरा के गुना रोड पर स्थित श्री कृष्ण वेयर हाउस ओर राधाकृष्ण वेयर हाउस में अवैध तरीके से पीडीएस के सरकारी चावल भरा हुआ है|

इसकी सूचना जब प्रशासन को मिली तो प्रशासन ने ब्यावरा के दोनो निजी वेयरहाउस पर छापा मारा| ट्रक ओर वेयर हाउस से प्रशासन ने 510 क्विंटल पीडीएस का चावल को पकड़ा है | जिन कट्टो में चावल मिला है उस पर भारत सरकार की सील लगी है , प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए वेयर हाउस को सील कर दिया है , लेकिन सवाल यही की आखिर में इतनी बड़ी मात्रा में गरीबो तक पहुचने वाला चावल निजी वेयर हाउस में आया कहा से|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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