लॉकडाउन में ढील मिलते ही बाजार में उमड़ी भीड़, सोशल डिस्टेंस का जमकर उल्लंघन

लॉकडाउन में ढील मिलते ही बाजार में उमड़ी भीड़, सोशल डिस्टेंस का जमकर उल्लंघन

राजगढ़

राजगढ़ से लोगो की बड़ी लापरवाही की तस्वीर सामने आई है, प्रशासन की अनदेखी से कहीं ऐसा न हो कि ये पूरे राजगढ़ जिले पर भारी पड़ जाए। लॉकडाउन के बीच भीड़ की ये तस्वीरें राजगढ़ जिले के ख़िलचीपुर के सर्राफा बाजार की है। लॉकडाउन में ढील देते हुए सुबह 7 से 12 बजे तक दुकानों को खोलने की छूट दी गई हैै। लेकिन बाजार खुला तो सर्राफा बाजार में खरीदी करने के लिए आस पास के ग्रामीण इलाकों से लोगो की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसकी वजह से बाजार में लोग सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ाते दिखे और बिना मास्क के ही लोग बाजारों में नजर आए।

ख़िलचीपुर में लॉकडाउन में ढील देते हुए सुबह 7 से 12 बजे तक दुकानों को खोलने की छूट दी गई। इसका शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने जमकर उल्लंघन किया। लॉकडाउन में छूट देते हुए प्रशासन ने मंगलवार को शहर में मेडीकल के अलावा जनरल स्टोर, जूता चप्पल, हार्डवेयर, मोबाइल, इलेक्ट्रिकल्स की दुकानों को खोलने की छूट सुबह 7 से 12 बजे तक दी थी। दुकान खुलने की सुविधा मिलने से शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग खरीददारी करने बाजार में उमड़ पड़े। ढील मिलते ही बिना मास्क लगाए घूमते रहे लोग, ख़िलचीपुर के सर्राफा बाजार में खरीददारी करने के लिए आए बुजुर्ग, महिलाएं, युवतियां और बच्चे बिना मास्क लगाकर घूमते रहे। इसके अलावा बाइक पर जहां एक लोग के बैठने की परमिशन है वहीं बाजार में आ रही अधिकतर बाइक में दो और तीन लोग बैठ कर घूमते रहे। लोग नियमों का पालन न करते हुए अपने जान के साथ दूसरों की जान से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। इनकी जरा सी लापरवाही सारे जिले पर भारी पड़ सकती है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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