अपना ही पैसा लेने के लिये बैंक के बाहर किसानों की लंबी कतार,लाइन में पासबुक रख कर रहे इंतजार

अपना ही पैसा लेने के लिये बैंक के बाहर किसानों की लंबी कतार,लाइन में पासबुक रख कर रहे इंतजार

राजगढ़

राजगढ़ में बैंक के बाहर किसान लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं। ये लोग अब बैंक पासबुक को जमीन पर रखकर लाइन में अपनी जगह पक्की कर रहे हैं। बैंक के बाहर धूप में परेशान किसानों ने चंदा इकट्ठा करके टेंट तक लगवा लिया। ये लोक समर्थन मूल्य पर गेंहू बेचने के बाद उसका पैसा लेने यहा आए हुए हैं।

बैंक के सामने लोगो की जगह जमीन पर बैंक की पास बुक की लंबी लाइन लगी है, ये तस्वीर है मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के बोड़ा शहर स्थित सहकारी केंद्रीय बैंक की। यहां लोगों की कतार की जगह बैंक की पासबुक की कतार देखी जा सकती है। दरअसल लोग ऐसा परेशानी से बचने के लिए कर रहे हैं। बैंक पास बुक को लाइन में लगाकर ये टहलते रहते हैं ओर अपनी बारी आने पर पास बुक उठाकर बैंक के अंदर प्रवेश करते हैं। बैंक के बाहर तेज धूप से बचने के लिए किसानों ने चंदा इकठ्ठा कर खुद के पैसे से बैंक के बाहर टेंट लगवाया ।

अन्नदाता को समर्थन मूल्य पर अपने गेहूं को बेचने के लिए दस-दस दिन तक समर्थन मूल्य केंद्र पर इंतजार करना पड़ा , जैसे तैसे गेहूं को तो तौल दिया लेकिन अब उसके रुपए लेने के लिए भी बैंकों के बाहर लाइन में लगना पड़ रहा है । यह तस्वीरें राजगढ़ जिले के बोड़ा की है जहां की जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने की राशि लेने आए किसानों को धूप से बचने के लिए बैंक ने कोई व्यवस्था नहीं की थी, ऐसी धूप में बिना टेंट के सुबह से लगे लाइन में किसानों का खड़ा रहना मुश्किल था। फिर किसानों ने खुद ही चंदे की राशि इकट्ठा की और टेंट लगवा लिया। किसान बैंक के बाहर अपनी पासबुक को नंबर में लगाकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे है। बैंक के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन नहीं हो पा रहा है लेकिन ध्यान देने वाला कोई नहीं है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews