दिवाली की खुशियां मातम में बदलीं, सड़क हादसे में 4 युवकों की मौत

दिवाली की खुशियां मातम में बदलीं, सड़क हादसे में 4 युवकों की मौत

रतलाम, सुशील खरे| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) के रतलाम जिले (Ratlam District) में दिवाली (Diwali) की रात सड़क हादसे (road accident) में 4 लोगों की मौत हो गई| जबकि दो लोग बुरी तरह घायल हो गए. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है| जहां दिवाली त्यौहार को उत्साह से मनाने की तैयारी चल रही थी, वहाँ अब मातम पसरा हुआ है|

जानकारी के मुताबक दिवाली की रात जिले के बांगरोद और धमोत्तर गांव के पास एक भीषण हादसा हो गया| दो बाइकों की जोरदार टक्‍कर में चार युवकों की मौत (Death) हो गई| इसके साथ ही दो युवक घायल हो गए| सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है| बताया जा रहा है कि धमोत्तर गांव के चार लोग पंकज, विक्रम, राहुल और अजय एक ही बाइक पर सवार होकर अपने खेत जा रहे थे| तभी सामने से बाइक पर आ रहे दीपक और जीवन की बाइक से उनकी टक्कर हो गयी| टक्कर इतनी जोरदार थी कि पंकज, विक्रम और दीपक की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गयी| जबकि राहुल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया| राहुल की एक वर्ष पहले ही शादी हुई है| उसके माता पिता का कई साल पहले निधन हो चुका है. वह दादी के पास रहता था| फिलहाल दो लोगों इलाज चल रहा है|

बाइक की टक्कर से साईकिल सवार की मौत
जिले में एक अन्य सड़क हादसे में एक वृद्ध की मौत हो गई| सैलाना थाना क्षेत्र के ग्राम दिवेल-खोखरा मार्ग पर बाइक की टक्कर से साइकिल पर सवार वृद्ध की मौत हो गई| हादसा शनिवार शाम करीब 4:30 बजे हुआ जब बाइक ने साइकिल को टक्कर मार दी| इससे साइकिल पर सवार 60 वर्षीय रमेशचंद्र पुत्र चंपालाल लखारा निवासी ग्राम धामनोद गंभीर रुप से घायल हो गए| उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया| प्राथमिक उपचार के बाद इंदौर रेफर किया गया| लेकिन रास्ते मे ही उन्होंने दम तोड़ दिया|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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