वीर सावरकर के मुखोटे पहन कर किया विरोध, एबीवीपी के छात्रों ने किया विरोध

वीर सावरकर के मुखोटे पहन कर किया विरोध, एबीवीपी के छात्रों ने किया विरोध

रतलाम। सुशील खरे।

रतलाम जिले के मलवासा के हाई स्कूल में वीर सावरकर के फोटो लगी रजिस्टर को एनजीओ द्वारा वितरित करने के मामले में स्कूल के प्राचार्य आर एन केरावत को उज्जैन संभागायुक्त द्वारा निलंबित किये जाने के बाद से भाजपा और कांग्रेस तो आमने सामने है ही लेकिन आज एबीवीपी के छात्रों ने हाथों में सावरकर की फोटो लिये ओर चेहरे पर सावरकर के मुखोटे पहन कर सैलाना बस स्टैंड पर विरोध किया । छात्रों का कहना है कि कमलनाथ सरकार यह भेदभाव गलत कर रही है जल्दी से जल्दी प्राचार्य का निलम्बन समाप्त किया जाए नही तो उग्र आंदोलन किया जावेगा ।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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