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रतलाम: प्रेम विवाह पर पंचायत का ‘अवैध’ फरमान, 8 परिवारों के बहिष्कार का वीडियो वायरल; प्रशासन ने दी चेतावनी

Written by:Ankita Chourdia
Published:
मध्य प्रदेश के रतलाम में एक पंचायत ने प्रेम विवाह करने वाले 8 परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का फैसला सुनाया। इस तुगलकी फरमान का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और ग्रामीणों को ऐसे फैसलों के गैर-कानूनी होने की चेतावनी दी।
रतलाम: प्रेम विवाह पर पंचायत का ‘अवैध’ फरमान, 8 परिवारों के बहिष्कार का वीडियो वायरल; प्रशासन ने दी चेतावनी

रतलाम, मध्य प्रदेश। जिले की पिपलोदा तहसील के पंचेवा गांव में पंचायत द्वारा प्रेम विवाह करने वाले परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुनाने का मामला सामने आया है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद जिला प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप किया।

जानकारी के अनुसार, गांव के लोग पिछले छह महीनों में आठ युवक-युवतियों के घर से भागकर शादी करने से नाराज थे। इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए शनिवार रात को एक बैठक बुलाई गई, जिसमें ग्रामीणों ने मिलकर इन परिवारों के खिलाफ कई प्रतिबंध लगाने का फैसला कर लिया।

बहिष्कार के लिए जारी हुआ फरमान

वायरल वीडियो में एक व्यक्ति हाथ में रजिस्टर लेकर बहिष्कार से जुड़े नियमों को पढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। इस फरमान के तहत कई कड़े और गैर-कानूनी प्रतिबंध लगाए गए।

फैसले के मुताबिक, प्रेम विवाह करने वाले परिवारों को गांव से बहिष्कृत किया जाएगा। उन्हें दूध, अनाज और किराने का सामान नहीं बेचा जाएगा और न ही कोई उनकी जमीन या खेत किराए पर ले सकेगा। इसके अलावा, किसी भी सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित करने पर भी रोक लगा दी गई। फरमान में यह भी कहा गया कि पंडित और नाई जैसी सेवाएं देने वाले लोग उनके घर कोई काम नहीं करेंगे।

वीडियो वायरल होते ही प्रशासन सक्रिय

रविवार को वीडियो सामने आते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। पिपलोदा जनपद के CEO बहा स्वरूप हंस, पटवारी और अन्य अधिकारियों के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें समझाया कि इस तरह का सामाजिक बहिष्कार कानूनन अपराध है और किसी भी पंचायत को ऐसा फैसला लेने का कोई अधिकार नहीं है।

इस मामले पर SDOP संदीप मालवीय ने कहा कि यदि कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराता है, तो नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्या कहता है कानून?

भारतीय कानून के अनुसार, 18 वर्ष की युवती और 21 वर्ष का युवक अपनी मर्जी से विवाह करने के लिए स्वतंत्र हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने कई फैसलों में स्पष्ट किया है कि खाप पंचायतों या ग्राम सभाओं द्वारा सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुनाना पूरी तरह से अवैध है। अदालत के मुताबिक, कोई भी पंचायत संविधान से ऊपर नहीं हो सकती और ऐसे जोड़ों को सुरक्षा देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

इस बीच, पंचायत के इस एकतरफा फैसले से कुछ ग्रामीणों में नाराजगी भी है। जिन परिवारों के बहिष्कार की बात कही गई है, उन्होंने इसे जबरन थोपा गया फैसला बताया है और कलेक्टर स्तर पर शिकायत करने की बात कही है।

पंचायत बैठक में क्या फैसला लिया गया

ग्रामीणों की बैठक में खुले तौर पर कहा गया कि—

  • जो युवक-युवती भागकर या लव मैरिज करेंगे, उनके परिवार को गांव से बहिष्कृत किया जाएगा
  • ऐसे परिवारों को दूध, अनाज और रोजमर्रा की सामग्री नहीं दी जाएगी
  • किसी सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित नहीं किया जाएगा
  • गांव का कोई व्यक्ति उनके खेत या जमीन को लीज पर नहीं लेगा
  • पंडित, नाई या अन्य सेवा देने वाले उनके घर कोई कार्य नहीं करेंगे
  • विवाह कराने वाले व्यक्ति, गवाह या सहयोग करने वालों पर भी सामाजिक प्रतिबंध लगाया जाएगा
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