यह कैसी लापरवाही, जलती चिता में डाल दिए पीपीई किट और ग्लव्ज

यह कैसी लापरवाही, जलती चिता में डाल दिए पीपीई किट और ग्लव्ज

रतलाम| कोरोना संकट (Corona Crisis) के इस दौर में मानवता के बेमिसाल उदाहरण देखने को मिल रहे हैं| वहीं कुछ अमानवीयता भी नजर आ रही है| मामला रतलाम (Ratlam) का है जहां कोरोना संदिग्ध महिला की मौत के बाद शव लेकर आये कर्मचारियों ने पीपीई किट और ग्लव्ज चिता में डाल दिए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है| कैमरे में कैद हुई इन लोगों की करतूत पर लोगों की कड़ी प्रतिक्रिया आ रही है|

जानकारी के मुताबिक मामला रतलाम के भक्तन की बावड़ी मुक्तिधाम का है| यहां जावरा की एक कोरोना संदिग्ध महिला का प्रोटोकॉल के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा रहा था| शव वाहन के साथ आये दो कर्मचारी चिटा के पास गए और अपना पीपीई सूट और हाथ में पहने ग्लब्स उतारे और जलती चिता में फेंक दिए|

परिवार को मौत की सूचना तक नहीं दी
बताया जा रहा है कि जावरा की महिला की बुधवार शाम माैत हाे गई थी। लेकिन प्रशासन ने परिजन काे इसकी सूचना तक नहीं दी। उनकी रिपोर्ट 2 बार निगेटिव आ चुकी थी। फिर भी नगर निगम ने कोरोना प्रोटोकॉल के तहत रतलाम में अंतिम संस्कार किया। परिवार वालों का आरोप है कि उन्हें मां की मौत की सूचना अस्पताल की बजाय कहीं और से मिली। उसके बाद वे सीधा मुक्तिधाम पहुंचे| जहां शव वाहन के साथ आए लोगों ने पीपीई किट और ग्लव्ज भी चिता में डाल दिए।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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