सर्वपितृ अमावस्या पर करें ये 5 खास उपाय, प्रसन्न होकर आशीर्वाद देंगे पितृ

पितृपक्ष में सबसे अंत में आने वाली सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय हमें पितरों का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
Sarva Pitra Amavasya

पितृ पक्ष का बहुत महत्व माना गया है और सबसे आखिर में आने वाले सर्वपितृ अमावस्या सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन सभी पितरों के निमित्त दान, धर्म और तर्पण किया जाता है। ऐसा कहां जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन पिंडदान और तर्पण करता है उसके पितरों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को आशीर्वाद मिलता है। इस साल 21 सितंबर को यह पर्व आ रहा है।

हिंदू पंचांग के मुताबिक अश्विन मास की अमावस्या तिथि सर्वपितृ अमावस्या कहलाती है। यह पितृपक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन उन लोगों का भी श्राद्ध किया जा सकता है जिनकी तिथि हमें मालूम नहीं है या फिर तिथि पर श्रद्धा संभव न हो पाया हो। मान्यताओं के मुताबिक इस दिन तर्पण और पिंडदान करने से पितृ तृप्त होते हैं और हमें आशीर्वाद देते हैं। चलिए हम आपको कुछ उपाय बताते हैं जो इस दिन विशेष तौर पर करने चाहिए।

पितरों के श्राद्ध का महत्व

पौराणिक शास्त्रों के मुताबिक पितरों की कृपा प्राप्त करने के उद्देश्य से ही 16 दिनों तक पितृपक्ष में दान, धर्म और तर्पण किया जाता है। ऐसा करने से घर में सुख, समृद्धि, शांति, स्वास्थ्य लाभ, संतान की उन्नति और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। यह केवल कर्मकांड करने का नहीं बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा दर्शाने का समय होता है। इस समय किसी भी पवित्र नदी में स्नान और तर्पण करने का विशेष महत्व है। अगर नदी आसपास उपलब्ध नहीं है तो घर पर शुद्ध जल से तर्पण कर सकते हैं।

सर्व पितृ अमावस्या के उपाय (Sarva Pitra Amavasya)

  • अमावस्या के दिन सुबह स्नान से निवृत्त होने के बाद अन्न, गाय, सोना और वस्त्र का दान करें।
  • इस दिन जो व्यक्ति ब्राह्मणों को भजन और पितरों का श्राद्ध करवाता है, उसे पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन शुद्ध स्थान पर जमीन में होली बनाएं और उसे पर रोली के छींटे लगाकर पुष्प चढ़ाएं। ये पितरों की पूजन के समान कहा गया है।
  • अब मिठाई और दक्षिण चढ़ाकर नमस्कार करें। अब आपको एक ब्राह्मण दंपति को भोजन कराकर तिलक लगाकर दक्षिणा देनी होगी। ऐसा करने से भोजन पितरों तक पहुंचता है और वह प्रसन्न होते हैं।
  • धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक चंद्रमा सूर्य से नीचे है इसलिए पृथ्वी पर किया गया दान सूर्य की किरणों से आकर्षित होकर चंद्र मंडल में जहां पितृगण रहते हैं वहां जाता है। यही कारण है कि अमावस्या के दिन श्राद्ध करने का विधान है।

Disclaimer: यहां दी गई सूचना केवल एक सामान्य जानकारी है। उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। MP Breaking News इसकी पुष्टि नहीं करता।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
Diksha Bhanupriy

10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
Follow Us :GoogleNews