
17 मई से पुरुषोत्तम मास यानी अधिकमास की शुरुआत हो चुकी है। ये महीना 15 जून तक चलने वाला है। धार्मिक दृष्टि से इसे बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। ये महीना जगत के पालनहार। श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। उनके पूजन से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि बढ़ जाती है।
आप सभी ने अपने घरों में शालिग्राम की पूजा जरूर की होगी। उन्हें भगवान विष्णु का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। ऐसा कहते हैं जो व्यक्ति पुरुषोत्तम मास में शालिग्राम की पूजा करता है। उसके जीवन में खुशहाली का आगमन होता। हालांकि, इस दौरान कुछ नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है।
शालिग्राम पूजा के नियम
भोग में तुलसी
शालिग्राम की पूजा करते समय जब आप भोग लगाएंगे तो इसमें तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें। भगवान विष्णु बिना तुलसी के भोग अर्पित नहीं करते और शालिग्राम उन्हीं का स्वरूप है इसलिए ये बात जरूर ध्यान रखें।
एक से अधिक शालिग्राम
घर के मंदिर में कभी भी एक से अधिक शालिग्राम नहीं रखना चाहिए। अगर ऐसा है तो पुरुषोत्तम मास में एक शालिग्राम आप किसी मंदिर में या फिर ब्राह्मण को दान कर सकते हैं।
तामसिक भोजन का सेवन
शालिग्राम की पूजा करते समय व्यक्ति को तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। घर में एक बार शालिग्राम विराजित हो जाता है तो परिवार के सदस्यों को मांस, मदिरा अन्य तामसिक चीजों का सेवन भूल कर भी नहीं करना चाहिए। लहसुन और प्याज से जितना दूर रहेंगे उतना अच्छा होगा। शालिग्राम जी का अपमान होता है और घर की सुख शांति भंग होती है।
सीधा जमीन पर ना रखें
घर में जो शालिग्राम मौजूद है उन्हें कभी भी जमीन पर नहीं रखना चाहिए। आप उन्हें थाली में या फिर लाल पीले कपड़े पर विराजमान कर सकते हैं।
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