आखिर कौन है मां काली? क्यों होतीं है हर तस्वीर में जीभ बाहर? जानें कई रोचक रहस्य

ma kali

hindu goddess kali clay sculpture

Maa Kali : इन दिनों मां काली को लेकर देशभर में चर्चा छिड़ी हुई है। सभी लोग उनके बारे में सब कुछ जानना चाहते है। कोई उनके रूप के बारे में जानना चाहता है कोई उनकी पूजा-उपासकों, मंदिरों को लेकर जानने की जिज्ञासा रखता है। ऐसे में क्या आप जानते है कौन है मां काली? क्या उन्हें सच में मांस-मछली-मदिरा का चढ़ावा चढ़ाया जाता है? अगर नहीं जानते है तो आज हम आपको बताने जा रहे है कि आखिर में मां काली कौन है। क्यों उन्हें मांस मदिरा का चढ़ाव चढ़ता है –

आपको बता दे, शास्त्रों में मां काली को मां पार्वती और मां सीता का रौद्र रूप बताया गया है। दरअसल, शास्त्रों की माने तो मां काली भोलेनाथ के रुद्रावतार महाकाल की पत्‍नी हैं। मां काली और शिव जी दोनों के ही पिंडी रूप की पूजा की जाती है क्योंकि मां काली और शिवजी दोनों ही निराकार है। हालांकि अब मां काली के रूप को लोगों ने एक नया अवतार दे दिया है और अब इसी नए अवतार की पूजा सभी मंदिरों में की जाती है। लेकिन असल में मां काली की पूजा पिंडी रूप में ही की जाती है। ऐसा अब भी प्राचीन मंदिरों में होता आ रहा है।

इसलिए चढ़ता है मां काली को मांस-मछली-मदिरा का चढ़ावा –

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इतना ही नहीं शास्त्रों में माता काली, भैरव और भगवान शिव जी को तामसिक देव बताया गया है। दरअसल, माता काली की उत्पत्ति असुरों का विनाश और धर्म की रक्षा करने के लिए की गई। अब तक मां काली ने कई असुरों और राक्षसों का विनाश किया है। मां काली ने महिषासुर, चंड और मुंड, धम्राक्ष, रक्तबीज आदि राक्षस का वध किया है।

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कहा जाता है कि मां काली की सबसे ज्यादा उपासना आदिवासी लोग करते है क्योंकि मां काली को तामसिक देवी माना गया है। ऐसे में उन्हें मांस, मछली, मदिरा और मुद्रा, अनाज का चढ़ावा चढ़ाने की प्रथा और परंपरा रही है। ये इसलिए क्योंकि आदिवासी लोग खेती नहीं करते वह सिर्फ जानवरों का शिकार करते रहे है। इतना ही नहीं आदिवासी लोगों में नवरात्री के दिनों में बलि देने की भी प्रथा सबसे ज्यादा प्रचलित बताई गई है।

इसलिए जीब रहती है बाहर –

शास्त्रों में बताया गया है कि रक्तबीज को मारने के बाद काली को खूब क्रोध आ गया। क्रोध में वह तांडव करने लग गई। ऐसे में उन्हें शांत करवाने के लिए भगवान महाकाल को उनके चरणों में लेटना पड़ा। जिसके बाद वह शांत हुई और शर्म की वजह से उन्होंने अपनी जीब बाहर निकाल ली। तब से उनकी जीब हर तस्वीर में बाहर ही बताई जाती है।

सबसे ज्यादा इन राज्यों में होती है मां काली की पूजा –

आपको बता दे, मां काली की सबसे ज्यादा पूजा अर्चना श्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश के आदिवासी इलाकों, बिहार, असम, ओडिशा और बांग्लादेश में होती है। यहां के लोग मां काली की पूजा तंत्र शक्तियां पाने के लिए भी करते है।

तंत्र ग्रंथों की बात –

तंत्र ग्रंथों में माता काली के 9 रूपों का वर्णन बताया गया है। जिसमें काली, दक्षिणाकाली, उग्रकाली, श्मशान काली, कामकलाकाली, कंकाली, रक्त काली, श्यामाकाली और वामा काली शामिल है। इतना ही नहीं काली दशमहाविद्याओं में पहली महाविद्या है।

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