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MP में फर्जी बैंक गारंटी से शराब ठेका लेने का खुलासा, EOW ने आबकारी अधिकारी, बैंक अधिकारी और ठेकेदारों पर दर्ज की FIR

Written by:Atul Saxena
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जांच के बाद बैंक मैनेजर नागेन्द्र सिंह, आबकारी अधिकारी अनिल जैन और शराब ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के आरोप में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 (सी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
MP में फर्जी बैंक गारंटी से शराब ठेका लेने का खुलासा, EOW ने आबकारी अधिकारी, बैंक अधिकारी और ठेकेदारों पर दर्ज की FIR

EOW reveals getting liquor contract in MP with fake bank guarantee: मध्य प्रदेश में धान उपार्जन घोटाला उजागर करने वाली ईओडब्ल्यू ने अब आबकारी विभाग का एक घोटाला उजागर किया है ये घोटाला है फर्जी बैंक गारंटी की मदद से शराब ठेके हासिल करने का, इसमें आबकारी अधिकारियों, बैंक अधिकारियों और शराब ठेकेदारों की मिलीभगत सामने आई है जिसके बाद ईओडब्ल्यू ने 8 नामजद और अन्य के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की है।

ईओडब्ल्यू ने रीवा जिले में फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर शराब ठेकों के आवंटन का पर्दाफाश किया है, जिसमें शराब ठेकेदारों, जिला आबकारी कार्यालय और जिला सहकारी बैंक शाखा मोरबा की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता  बी के माला ने 28 जून 2023 को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) में शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर EOW ने जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि शराब ठेकेदारों को नियमों के विरुद्ध जाकर फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर लाइसेंस दिए गए।

जाँच में सामने आया कि जिला सहकारी बैंक शाखा मोरबा (सिंगरौली) के तत्कालीन प्रभारी शाखा प्रबंधक नागेन्द्र सिंह ने 15 करोड़ 32 लाख 23 हजार 440 रुपये की 14 फर्जी बैंक गारंटी जारी की। इनमें से 9 बैंक गारंटी शराब ठेकेदारों को दी गईं, जिनका इस्तेमाल उन्होंने रीवा, सिंगरौली, उमरिया और सतना जिलों में शराब ठेकों के लाइसेंस प्राप्त करने के लिए किया।

नियमानुसार मध्य प्रदेश शासन की आबकारी नीति के अनुसार, शराब ठेकों के लिए बैंक गारंटी किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसूचित व्यवसायिक बैंक / निजी क्षेत्र के अनुसूचित व्यवसायिक बैंक/म.प्र. राज्य के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, से ही जारी की जा सकती थी। लेकिन इस मामले में  जिला सहकारी केंद्रीय बैंक द्वारा जारी बैंक गारंटी को स्वीकार किया गया जो भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा अनुसूचित बैंकों की सूची में शामिल नहीं है।

जांच दल ने भी अपनी रिपोर्ट में अनियमितता का दोषी पाया 

जिला आबकारी अधिकारी अनिल जैन ने नियमों के विपरीत जाकर इन फर्जी बैंक गारंटियों को स्वीकार किया व शराब ठेकेदारों को ठेके दिए। जांच में यह भी सामने आया कि बाद में जब शिकायत हुई तो अनिल जैन ने लाइसेंसियों से अनुसूचित बैंकों की गारंटी प्राप्त कर इस अपराध को दुरुस्त किया। शराब ठेकेदारों ने बैंक मैनेजर और आबकारी अधिकारी के साथ मिलकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया। उन्होंने बिना किसी संपत्ति / प्रतिभूति या जमा राशि के फर्जी बैंक गारंटी प्राप्त की। सहकारी बैंक के तीन सदस्यीय जांच दल ने भी अपनी रिपोर्ट में नागेन्द्र सिंह और शिवशंकर सिंह द्वारा गंभीर अनियमितता करने की पुष्टि की है।

बैंक मैनेजर ने नियमों की अनदेखी कर जारी की गारंटी 

बता दें मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, सीधी के 27 जून, 2023 के प्रतिवेदन के अनुसार, बैंक गारंटी जारी करने की नीति निर्धारण का अधिकार बैंक संचालक मंडल या स्टाफ उप-समिति के पास है और मध्य प्रदेश राज्य सहकारी बैंक के नियमों के तहत, काउंटर गारंटी पर ही बैंक गारंटी जारी हो सकती है लेकिन  नागेन्द्र सिंह द्वारा इस नीति का उल्लंघन किया गया।

FIR में इन लोगों के नाम शामिल 

EOW ने जिनके खिलाफ FIR दर्ज की है उसमें तत्कालीन प्रभारी शाखा प्रबंधक, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, शाखा मोरबा जिला सिंगरौली  नागेन्द्र सिंह, मेसर्स माँ लक्ष्मी इण्टरप्राईजेज, वैकुण्ठपुर, हनुमना, नईगढी, देवतालाब शराब दुकान समूह के प्रोपराइटर नृपेन्द्र सिंह, मेसर्स आशा ऐन्टरप्राईजेज, इटौरा शराब दुकान समूह प्रोपराइटर अजीत सिंह,  मउगंज शराब दुकान समूह के प्रोपराइटर उपेन्द्र सिंह बघेल, रायपुर कर्चुलियान शराब दुकान समूह के प्रोपराइटर आदित्य प्रताप सिंह, मेसर्स आर्याग्रुप, समान नाका शराब दुकान समूह के प्रोपराइटर विजय बहादुर सिंह, तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी रीवा अनिल जैन और अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।