13 प्राथमिक स्कूलों को अन्य स्कूलों में किया मर्ज, जनसुनवाई में पहुंचे आदिवासी बच्चे बोले रास्ते में जंगल कैसे जायेंगे?

बच्चों ने बताया कि खिसौदा स्कूल को देवल में मर्ज कर दिया गया है जो गांव से 5 किलोमीटर दूर है। रास्ते में जंगल और तालाब पड़ता है, स्कूल कैसे जायेंगे , कौन सुरक्षा करेगा?
Bina schools merged children protest to Collector

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शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल मर्ज जिए जाने होने से नाराज मासूम आदिवासी बच्चों ने बीना से सागर पहुंचकर कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत की। बीना ब्लॉक के 13 प्राथमिक स्कूलों को अन्य स्कूलों में मर्ज किए जाने के विरोध में पूर्व जनपद अध्यक्ष इंदर सिंह ठाकुर, शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय और ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम एसडीएम रविश श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपा।

पूर्व जनपद अध्यक्ष इंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस की सरकार के समय पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर ने मजरा टोलों पर स्कूल खुलवाए थे ताकि आदिवासी और अनुसूचित जाति-जनजाति के बच्चे शिक्षा ले सकें। लेकिन अब दौलतपुर, रूपऊ, मुरयाना, खिसौदा, तजपुरा, मूडरी, भोजपुर, कचनौदा, बरोदिया सहित 13 स्कूलों को अचानक अन्य स्कूलों में मर्ज कर दिया गया है।

आदिवासी बच्चों का शिक्षा स्तर सुधारने खोले गए थे स्कूल 

पूर्व प्राचार्य एवं बीआरसीसी अशोक परिहार ने बताया कि पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर के शासन काल में आदिवासी अनुसूचित जाति के बच्चों को शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए मजारे टोलों पर स्कूल स्थापित किए गए थे किंतु इस तरह से स्कूल को दूसरे स्कूलों में मर्ज करना यह न्याय संगत नहीं है उन्हें यथा स्थिति में रहने दिया जाए ताकि आदिवासी बच्चे शिक्षा से वंचित न हो। उन्होंने मांग की कि स्कूलों को मर्ज न किया जाए। शिक्षक कम करने हों तो कर दिए जाएं, लेकिन नादान बच्चों को शिक्षा से वंचित न किया जाए। शिक्षा प्राप्त करना उनका अधिकार है।

बच्चों ने बताई परेशानी

ज्ञापन देने पहुंचे बच्चों ने बताया कि खिसौदा स्कूल को देवल में मर्ज कर दिया गया है जो गांव से 5 किलोमीटर दूर है। रास्ते में जंगल और तालाब पड़ता है। इस कारण वे स्कूल जाने में असमर्थ होंगे और शिक्षा से पूरी तरह वंचित हो जाएंगे, ज्ञापन में लिखा गया कि बीना ब्लॉक में शासकीय प्राथमिक स्कूलों की संख्या लगातार कम हो रही है। खिसौदा गांव के स्कूल को देवल में शिफ्ट किया गया है। देवल जाने के रास्ते में जंगल पड़ता है। पहले से ही स्कूलों का रखरखाव बंद था, इमारतें जर्जर हो गई थीं, उनकी मरम्मत और रंगाई-पुताई नहीं हुई।

अधिकारियों ने कहा बच्चों का अहित नहीं होने देंगे 

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार आदिवासी और अनुसूचित जाति के बच्चों को पढ़ाना नहीं चाहती।  ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नितेश दुबे, एवं बीआरसीसी महेंद्र जाट ने कहा कि शीघ्र ही पुनः जांच कराकर बच्चों का अहित नहीं होने देंगे।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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