VIDEO : सिंधिया समर्थक मंत्री का कांग्रेस प्रेम! बीजेपी के लिए यह क्या बोल गए

VIDEO : सिंधिया समर्थक मंत्री का कांग्रेस प्रेम! बीजेपी के लिए यह क्या बोल गए

सागर/सुरखी, बृजेन्द्र रायकवार। ज्योतिरादित्य सिंधिया के सम्मान के लिए इस्तीफा देकर कांग्रेस सरकार को अल्पमत में लाने वाले नेताओं का कांग्रेस प्रेम लगता है अब भी जहन में है। यही कारण है कि कभी भाजपा को खूब कोसने वाले नेताओं की जुबान उसी पार्टी के खिलाफ अब भी फिसल रही है। सिंधिया के खास और प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत अपनी ही पार्टी (भाजपा) के खिलाफ बोल गए। उन्होंने कहा भाजपा को नकली राम नाम का भगवा झंडा धारण करना पड़ रहा है।

सागर जिले की सुरखी विधानसभा में उपचुनाव है और उपचुनाव में भाजपा से राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत लगभग चुनावी मैदान में हैं और राम नाम का सहारा जमकर ले रहे हैं । मंत्री गोविंद सिंह राजपूत द्वारा सुरखी विधानसभा में राम शिला रथ यात्रा 2 सितंबर से 13 सितंबर तक गांव-गांव निकाली गई, 14 सितंबर को सागर के पहलवान बब्बा हनुमान मंदिर में राम शिला रथ यात्रा का समापन कार्यक्रम रखा गया था, इस कार्यक्रम में मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत की पत्रकारों से बात करते हुए जुबान फिसल गई।

उन्होंने कहा कि भाजपा को नकली राम नाम का भगवा झंडे का धारण करना पड़ रहा है, लेकिन जनता सब जानती है, मुंह में राम बगल में छुरी यही काम कांग्रेस का हमेशा रहा है। इस दौरान उन्होंने उस पार्टी पर कटाक्ष कर दिया जिस पार्टी के चुनाव चिन्ह पर वह सुरखी विधानसभा का उपचुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे है। इस बयान से कही न कही मंत्री के अंदर छुपा कांग्रेस प्रेम सामने आ रहा है ।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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