सतना जिले के कृपालपुर स्थित 100 सीटर पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास में भोजन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना के तहत रह रहे छात्रों ने आरोप लगाया है कि उन्हें लगातार खराब गुणवत्ता का खाना दिया जा रहा है। सोमवार को मामला तब गंभीर हो गया जब छात्रों ने भोजन में कीड़े मिलने का दावा किया और इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया।
वीडियो सामने आने के बाद छात्रावास में हंगामे की स्थिति बन गई। छात्रों का कहना है कि कई दिनों से खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की जा रही थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा। डिप्टी कलेक्टर ने छात्रावास का निरीक्षण कर छात्रों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं।
OBC छात्रावास भोजन विवाद
कृपालपुर छात्रावास में शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना के तहत युवाओं को सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा सेवाओं की तैयारी कराई जा रही है। इस योजना का मकसद युवाओं को मुफ्त आवास, भोजन और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।
छात्रों का आरोप है कि योजना का उद्देश्य भले ही अच्छा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि तय मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं दिया जाता और खाने की गुणवत्ता भी लगातार खराब बनी हुई है। कई छात्रों ने दावा किया कि भोजन में स्वच्छता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। खाने में कीड़े मिलने की शिकायत के बाद छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि जब युवाओं को देश सेवा के लिए तैयार किया जा रहा है, तब उनके स्वास्थ्य और पोषण से समझौता नहीं होना चाहिए। इस घटना ने छात्रावास प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शौर्य संकल्प योजना पर उठे सवाल, प्रशासन ने सुधार का दिया भरोसा
शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना को मध्य प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में गिना जाता है। इसके तहत युवाओं को प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। हालांकि सतना में सामने आए इस मामले ने योजना के संचालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफलता केवल पढ़ाई या शारीरिक प्रशिक्षण पर निर्भर नहीं करती, बल्कि छात्रों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं। पौष्टिक और स्वच्छ भोजन छात्रों की सेहत और प्रदर्शन दोनों पर सीधा असर डालता है। प्रशासन ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि भोजन की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल छात्र बेहतर भोजन व्यवस्था और नियमित निगरानी की मांग कर रहे हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सही गुणवत्ता के साथ पहुंच रहा है या नहीं। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी रहेगी।






