नवरात्रि के पहले दिन मंदिरों में दिखा कोरोना वायरस का असर

नवरात्रि के पहले दिन मंदिरों में दिखा कोरोना वायरस का असर

सीहोर।अनुराग शर्मा।

कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुवे नवरात्रि के पहले दिन मंदिरों में कोरोना वायरस का दिखा असर जहां नवरात्रि के दिन मंदिरों में भक्तों का जन सैलाब लगा रहता था। आज मंदिरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। हरदौल लाला मंदिर में नव मी के दिन भंडारा होता है। पंडित अखिलेश राजोरिया ने बताया कि कोरोना वायरस को लेकर भंडारे को भी स्थगित कर दिया गया हैं।

प्रधानमंत्री ने आज से 21 दिन का लॉक डाउन की घोषणा कर दी है आज प्रशासन ने शक्ति से दुकानें खुली थी उन्हें बंद कराई। जो लोग फ़ालतू घूम रहे थे उन्हें उठक बैठक लगवा कर समझाइश देकर घर भेजा। नगर की जनता के लिए लॉक डाउन एक उत्सव की तरह हो गया बिना किसी आवश्यक कार्य के जनता अपने घरों से तफ़री करने निकली। सोशल मीडिया में जब इसको लेकर हलचल तेज़ हुई तक कही जाकर राजस्व अमला सड़को पर उतारा और पब्लिक को समझाइश देकर घर भेजा कई खुली दुकानों को भी इस दौरान बंद करवाया गया।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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