ज्योति गौर ने किया शहर का नाम रोशन

ज्योति गौर ने किया शहर का नाम रोशन

सीहोर। अनुराग शर्मा।

कृषि विभाग में पदस्थ माधव सिंह गौर की सुपुत्री ज्योति गौर ने सीहोर जिले की फुटबॉल महिला खिलाड़ी ज्योति गौर ने सीहोर ओर प्रदेश का नाम रोशन किया है ज्योति गोर मध्यप्रदेश की एक मात्र महिला राष्ट्रीय लेवल की फुटबाल रेफरी है जिन्होंने 2 दर्जन से अधिक राष्ट्रीय फुटबॉल मैच में अपना प्रतिनिधित्व एक महिला फुटबॉल रेफऱी के तौर पर किया है उन्होंने 2 बार खेलों इंडिया में बतौर फुटबाल रेफरी की अहम भुमिका निभाई अभी आयोजित खेलों इंडिया गुवहाटी में भी उन्होंने मैच विभागीय के तौर पर अपनी भूमिका निभाई ज्योति गोर मध्य में 12 बार मध्यप्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व भी फुटबाल खेल कर कर चुकी है बे बताती है कि उन्होंने फुटबॉल खेलने के साथ रेफरी में उन्होंने2013 में एग्जाम पास किया उसके बाद 2015 में गांधीनगर गुजरात मे उन्होंने फिटनेस ओर एग्जाम पास करके नेसनल लेवल के रेफरी के लिए क्वालीफाई किया और अब बह बेंगलुरू में चल रही इंडियन बमेंन हीरो इंडियन लीग में अपनी भूमिका एक रेफ्रेरी के तौर पर निभा रही है ज्योति गोर बताती है कि उनके पापा खुद कॉलेज टाइम के बहुत अच्छे खिलाड़ी रह चुके है और इनकी बड़ी बहन भी एक बहुत अच्छी हैंडबॉल की नेशनल खिलाड़ी थी और अब भावना गोर मध्यप्रदेश पुलिस: में अपनी सेवा दे रही है और एक बहन सीमा गोर ग्वालियर अकादमी में हॉकी खिलाड़ी थी अब बह भी भोपाल स्कूल में अपनी सेवा दे रही है बही ज्योति गोर की सबसे छोटी बहन शिवांगी गौर फुटबाल की सीनियर नेशनल खिलाड़ी है और अब बह महारानी लक्ष्मीबाई विश्वविद्यालय से शारीरिक शिक्षा का अध्ययन कर रही है ज्योति गोर ने अपनी शिक्षा सिहोर के उत्कृष्ट विद्यालय से पूरी की ज्योति गोर गत में स्कूल टाइम से फूटबाल खेल रही है ज्योति गोर भी बरकत उल्लाह विश्वविद्यालय से शारीरिक शिक्षा का अध्ययन करने के साथ देहली पब्लिक स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर के पद पर है और बहा सीहोर में चर्च ग्रोउंड पर अपना दैनिक अभ्यास करती है बह मनोज कन्नौजिया के मार्गदर्शन में अपना अभ्यास करती है ज्योति का नेसनल में अपनी भूमिका निभाते देख उनके परिवार बालो में काफी हर्ष ब्यक्त किया।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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