कृषि बिल का विरोध, हाथों में जलती मशाल लेकर सड़कों पर निकले कांग्रेसी

कृषि बिल का विरोध, हाथों में जलती मशाल लेकर सड़कों पर निकले कांग्रेसी

सीहोर, अनुराग शर्मा| कृषि बिल को लेकर देश भर में बवाल मचा हुआ है| सत्तारूढ़ भाजपा सरकार इसे जहां किसानों का हितकारी बिल बता रही है तो वही कई किसान संगठन और विपक्षी पार्टियों बिल के विरोध में खुलकर प्रदर्शन कर रही है| मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में गुरुवार को कृषि बिल के विरोध में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता ने मशाल जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की|

विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विधायक कुणाल चौधरी ने कहां कि सरकार द्वारा लाए जा रहे किसान बिल के कारण देश भर के किसान आंदोलित हैं और इस बिल में सरकार की कुछ उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की मंशा है| कांग्रेस पार्टी किसी भी सूरत में किसानों का अपमान नहीं होने देंगे । भू अधिग्रहण कानून के विरोध में हमारे 44 सांसदों ने लोकसभा को घुटने के बल बिठाया था भाजपा विरोधी किसान पार्टी है जब किसानों पर अत्याचार हुआ है सब किसानों के साथ कांग्रेस हमेशा खड़ी रही है भाजपा में किसानों के पेट पर लात छातियों पर गोली मारी है|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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