नाराज पत्रकारों से कैबिनेट मंत्री ने मांगी माफी, प्रोटोकॉल तोड़ जमीन पर बैठे

नाराज पत्रकारों से कैबिनेट मंत्री ने मांगी माफी, प्रोटोकॉल तोड़ जमीन पर बैठे

शहडोल। मो अनीश तिगाला।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल आज शहडोल दोरा था विभागीय बैठकों समीक्षा के बाद में पत्रकारों को संबोधित करना था मंत्री पत्रकार वार्ता के लिए दोपहर 2:00 का कार्यक्रम जनसंपर्क विभाग द्वारा सर्किट हाउस में रखा गया था लेकिन 3:30 बजे तक मंत्री नहीं पहुंचे।जिस कारण पत्रकार नाराज होकर सर्किट हाउस से बाहर निकल आये। कलेक्टर ललित दाहिमा के माध्यम से यह खबर ग्रामीण और पंचायत विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल तक पहुँची।बैठक में शामिल मंत्री ने बैठक से बाहर निकलकर सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुँचे और पत्रकारों के बीच गाड़ी से उतरकर पहुंच गए।

मंत्री ने देर के लिए सार्वजनिक तौर पर देरी के लिए माफी माँगी और देर होने के कारणों से अवगत कराया।.मंत्री ने पत्रकारों से कलेक्टर कार्यालय भवन के बाहर प्राँगण में चाय पीने की आई चर्चा को स्वीकार करते हुए कहा जरूर पियेंगे।.यह कह कर कमलेश्वर पटेल वहीं कुर्सी और बैठने की जगह न होने के कारण जमीन पर ही बैठ कर नाराज पत्रकारों का दिल जीत लिया।शहडोल के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब किसी कैबिनेट स्तर के मंत्री ने प्रोटोकॉल को तोड़कर इस तरह जमीन पर बैठकर चर्चा की हो।यही नही मंत्री के सड़क पर बैठकर चर्चा शुरू करते ही कई पीड़ित अपनी शिकायत लेकर पहुँच गए।कमलेश्वर ने उनकी शिकायत लेने व सुनने के बाद कार्यवाही का आश्वासन भी दिया।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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