मरीज को बेड पर बांधने के मामले में बड़ी कार्रवाई, अस्पताल सील, प्रबंधक के ख़िलाफ़ FIR

मरीज को बेड पर बांधने के मामले में बड़ी कार्रवाई, अस्पताल सील, प्रबंधक के ख़िलाफ़ FIR

शाजापुर| मध्य प्रदेश के शाजापुर (Shajapur) में एक निजी अस्पताल में उपचार का बिल नहीं चुकाने पर मरीज को बंधक बनाने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है| CMHO और प्रशासन ने सिटी हॉस्पिटल (City Hospital) का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर उसको सील कर दिया है। वहीं अस्पताल के प्रबंधक के ख़िलाफ़ FIR दर्ज कर पूरे प्रकरण की पुलिस जाँच की जा रही है| मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj SIngh Chauhan) ने ट्वीट (Tweet) कर इसकी जानकारी दी|

शनिवार को शाजापुर के सिटी हॉस्पॉटीकल में एक बुजुर्ग मरीज को पलंग से बांधने का मामला सामने आया था| अस्पताल पर आरोप है कि बिल का भुगतान न करने पर अस्पताल वालों ने ऐसा किया| राजगढ़ जिले के रनारा गांव के निवासी लक्ष्मीनारायण दांगी को पेट में तकलीफ होने पर इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था| जब परिजन उन्हें घर ले जाना चाह रहे थे तो अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें रोक लिया। मरीज की बेटी सीमा दांगी ने आरोप लगाए कि उनके पास रुपए नहीं थे, इसलिए मरीज को ले जा रहे थे। अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें रोक लिया और उनके पिता के पलंग से हाथ-पैर बांध दिए।

मामला मीडिया में आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया | वहीं घटना की जानकारी होने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद CMHO और प्रशासन ने सिटी हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर उसको सील कर दिया है। वहीं अस्पताल प्रबंधक पर भी एफ़॰आई॰आर॰ दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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