पैरोल पर छूटे शख्स ने पत्नी की कुल्हाड़ी मारकर हत्या की, फिर खुद फांसी पर झूला

पैरोल पर छूटे शख्स ने पत्नी की कुल्हाड़ी मारकर हत्या की, फिर खुद फांसी पर झूला

शिवपुरी| जिले के करेरा करैरा थाना क्षेत्र के टीला गांव में जेल से 15 दिन की पैरोल पर लौटे शख्स ने कुल्हाड़ी से हमला कर पत्नी की हत्या कर दी। बाद में खुद भी फांसी पर झूल गया। परिजन ने सुबह देखा तो पुलिस को जानकारी दी गई।

टीला निवासी 35 वर्षीय कैलाश जाटव ने वर्ष 2006 में अपने चाचा के बेटे और एक बच्चे की हत्या के मामले में उसे 2008 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वह ग्वालियर सेंट्रल जेल में सजा काट रहा था। लॉकडाउन के पहले वह 15 दिन के पैरोल पर आया था। लॉकडाउन के बाद वह अपने घर रुका रहा। बुधवार सुबह कैलाश और उसकी पत्नी कलादेवी घर से बाहर नहीं आए तो अंदर जाकर देखा। वहां कलादेवी लहुलुहान पड़ी थी और कैलाश फांसी पर झूल रहा था। घर के अंदर खून से सनी कुल्हाड़ी मिली जिससे अंदेशा लगाया गया कि इसी से उसकी हत्या की गई|

परिजन ने सुबह देखा तो पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस की शुरुआती जांच में पति के मानसिक विक्षिप्त होने की बात सामने आई है। कैलाश की 12 और 15 साल की बेटिया हैं। वह दोनों अपनी बुआ के घर नौनेर गई थीं। बुआ के घर कुछ दिन बाद शादी है और बहन भात मांगने के लिए घर आने वाली थी। किसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था, जिसके बाद कैलाश ने कला की हत्या कर दी और खुद भी फांसी पर झूल गया।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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