वन मेन आर्मी के नायक बनने लोगों की जान खतरे में डाल रहे शिवराज : अजय सिंह

वन मेन आर्मी के नायक बनने लोगों की जान खतरे में डाल रहे शिवराज : अजय सिंह

सीधी@पंकज सिंह| पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर बड़ा हमला बोला है| कोरोना संकट काल में अकेले डटे शिवराज पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा अपने निजी स्वार्थों और खरीद फरोख्त की राजनीति के संकट से घिरे शिवराज मंत्रिमंडल का गठन नहीं कर पा रहे हैं | इससे निरंतर हालात खराब हो रहे हैं | मध्यप्रदेश की जनता इसके लिए उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगी |

अजय सिंह ने कहा कि वन मेन आर्मी के नायक बनने के चक्कर में एक्सीडेंटल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता की जान खतरे में डाल दिया है | श्री सिंह ने कहा कि कोरोना से बचाव के बदले में अपने प्रचार और पी०आर० करने में मुख्यमंत्री लगे हैं | मध्यप्रदेश पूरे देश में ऐसा राज्य है जहाँ हालात निरंतर बदतर होते जा रहे हैं |

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज जनता की चिंता में दुबले हो रहे शिवराज सिंह जवाब दें कि जब पूरा विश्व और हमारा देश कोरोना के कहर से ग्रसित था तब वे मध्यप्रदेश में सरकार गिराने और मुख्यमंत्री बनने के सपने को साकार करने में लगे थे | मध्यप्रदेश के इस शर्मनाक इतिहास के नायक शिवराज सिंह चौहान हैं | यही वह दिन थे जब कोरोना की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाये जाने थे तब भाजपा एक चुनी हुई सरकार को गिराने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही थी | पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भोपाल और इन्दौर में जिस तेजी से हालात बदतर हो रहे हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश का दूर दराज इलाका कितनी खतरनाक स्थिति से गुजर रहा होगा | ग्रामीण क्षेत्रों की तो अभी तक कोई सुध नहीं ली गई है |

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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