कोरोना पर भारी रिश्वतखोरी, एक और पटवारी रंगेहाथों पकड़ाया

कोरोना पर भारी रिश्वतखोरी, एक और पटवारी रंगेहाथों पकड़ाया

सीधी, डेस्क रिपोर्ट| कोरोना संकट (Corona Crisis) के चलते जहां आम आदमी परेशान है, वहीं प्रदेश में रिश्वत (Bribe) का खेल भी जारी है| पिछले दो दिनों में ही तीन केस सामने आये हैं| अब प्रदेश के सीधी जिले में एक और पटवारी रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ाया है| इससे पहले बुधवार को पन्ना जिले में भी एक पटवारी को लोकायुक्त (Lokayukta) की टीम ने रंगेहाथों पकड़ा था|

जानकारी के मुताबिक, लोकायुक्त टीम रीवा ने पटवारी को ढाई हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है। जमीन बंटवारे की कार्रवाई को लेकर पटवारी महेश कुमार कोल, हल्का मनकीसर तहसील रामपुर नैकिन ने रिश्वत मांगी थी| जिसकी शिकायत लोकायुक्त तक पहुंची| जिसके बाद गुरूवार को लोकायुक्त ने कार्रवाई करते हुए पटवारी को रंगेहाथों पकड़ा है|

राजेंद्र वर्मा एसपी लोकायुक्त रीवा के मुताबिक पटवारी महेश कुमार कोल ने जमीन बंटवारे के लिए अजय प्रसाद पुत्र राजेंद्र प्रसाद निवासी मनकीसर से तीन हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। पांच सौ रुपये पहले किस्त में लिए जा चुके थे| लोकायुक्त टीम ने सुभाष नगर स्थित महेश कोल के घर में 25 सौ रुपये रिश्वत लेते पटवारी को पकड़ा है। यह कार्रवाई प्रवीण सिंह परिहार एवं निरीक्षक डोमान सिंह मरावी के नेतृत्व में की गई है।

लोकायुक्त ने कसा शिकंजा
इससे पहले बुधवार को इंदौर में लोकायुक्त ने बिजली कंपनी के सहायक यंत्री को रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा था। वहीं पन्ना जिले के पवई में लोकायुक्त पुलिस ने एक पटवारी को अदालत में चल रहे अतिक्रमण के मामले को खारिज करने के एवज में पहली किश्त के तौर पर 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। वहीं सीधी जिले में ही हफ्ते पर पहले आयुष कार्यालय में पदस्थ लेखापाल को रंगेहाथों रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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