अधूरी काम को देख भड़के कैबिनेट मंत्री, अधिकारी ने कहा-‘SORRY SIR’

अधूरी काम को देख भड़के कैबिनेट मंत्री, अधिकारी ने कहा-‘SORRY SIR’

टीकमगढ़।आमिर खान।

केबिनेट मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर जब स्कूल की बिल्डिंग का लोकार्पण करने पहुंचे, तब वहां बिल्डिंग का अधूरा निर्माण देखकर वह नाराज हो गए और उन्होंने पीआईयू के ईई मनीष उदेनिया को फटकार लगा डाली। ईई ने मंत्री की फटकार के बाद बोला सॉरी सर..! इस समय यहां मौजूद कलेक्टर हर्षिका सिंह ने भी अपना सिर नीचे कर लिया और चुपचाप खड़ी रही, फिर ईई ने केबिनेट मंत्री बृजेन्द्र सिंह राठौर को अपनी बातों से संतुष्ट किया।

मामला टीकमगढ़ जिले के वर्मा डांग का है। जहां केबिनेट मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर स्कूल भवन की बिल्डिंग का लोकार्पण करने पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्होंने जैसे फीता काटकर स्कूल में प्रवेश किया, तो वहां कुछ अधूरा काम पड़ा, जिसे देख वह नाराज हो गए और उन्होंने वहां मौजूद पीआईयू के ईई मनीष उदेनिया को फटकार लगा डाली और कहा कि पहले निर्माण कार्य तो पूरा करा लेते इसके बाद लोकार्पण कराते। इसके बाद ईई उदैनिया ने बगले झांकते हुए केबिनेट मंत्री को सफाई दी। फिलहाल इस घटनाक्रम के दौरान वहां कलेक्टर टीकमगढ़ हर्षिका सिंह भी मौजूद थी, जिन्हें ईई की इस गलती के बाद सिर झुका कर खड़ा रहना पड़ा। यह समय अधिकारियों के लिए बड़ा खराब होता है, जब कलेक्टर को अपने अधीनस्थ की गलती पर पर्दा डालना पड़ता है। यही कल टीकमगढ़ कलेक्टर ने भी किया। ईई उदैनिया वैसे भी अक्सर विवादों में रहते हैं, तो एकबार फिर एक विवाद में आना और डांट खाना कोई बड़ी बात नहीं होगी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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