खनिज अधिकारी ने की पत्रकार से मारपीट,सीसीटीवी में कैद घटना

खनिज अधिकारी ने की पत्रकार से मारपीट,सीसीटीवी में कैद घटना

टीकमगढ़/आमिर खान

मध्यप्रदेश में अफसरशाही इतनी हावी हो चुकी है कि अब अधिकारी पत्रकारों को भी अपना निशाना बनाने लगे हैं। प्रदेश के गुना जिले में दलित के साथ पुलिस की बर्बरता का मामला थमा नहीं था कि इसी प्रदेश में एक अधिकारी ने पत्रकार के साथ थाने के अंदर गुंडागर्दी की और उसका मोबाइल छीनने के बाद बेरहमी से मारपीट कर डाली।

टीकमगढ़ जिले में एक दैनिक समाचार पत्र के संवाददाता को कवरेज करना इतना महंगा पड़ गया की प्रदेश की अफसरशाही की एक और तस्वीर उजागर हो गई। घटना 14 जुलाई की है। जिले के खनिज अधिकारी प्रशांत तिवारी शहर के एक स्थान पर रेत से भरे वाहन पर कार्यवाही कर रहे थे इसी दौरान दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार सूर्य प्रकाश खरे वहां पहुंच गए और उन्होंने कार्यवाही को अपने मोबाइल के कैमरे में कैद करना शुरू कर दिया। लेकिन खनिज अधिकारी को यह इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने पत्रकार को पहले तो धमकाया, डंडा दिखाया इसके बाद देहात थाने के अंदर उनका मोबाइल छीन लिया। मामले की जानकारी जैसे ही जिले के पत्रकारों को लगी तो उन्होंने तत्काल जिले के पुलिस कप्तान और कलेक्टर से मुलाकात कर कार्यवाही की मांग की। मामले को जांच में लिया गया और गुरूवार को इस मामले में पुलिस ने खनिज अधिकारी प्रशांत तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज लिया। थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे ने खनिज अधिकारी की दबंगई जग जाहिर कर दी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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