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Fri, Jan 9, 2026

7 साल बाद उज्जैन में लौटा ‘लघु कुंभ’, महाकाल नगरी में राज्य स्तरीय युवा उत्सव का भव्य आगाज़

Written by:Bhawna Choubey
Published:
महाकाल की नगरी उज्जैन में सात साल बाद राज्य स्तरीय युवा उत्सव का आयोजन हुआ। 800 से ज्यादा छात्र-छात्राओं की भागीदारी, मुख्यमंत्री मोहन यादव की वर्चुअल मौजूदगी और रोजगारोन्मुख शिक्षा पर फोकस ने इसे युवाओं का ‘लघु कुंभ’ बना दिया।
7 साल बाद उज्जैन में लौटा ‘लघु कुंभ’, महाकाल नगरी में राज्य स्तरीय युवा उत्सव का भव्य आगाज़

महाकाल नगरी उज्जैन एक बार फिर युवा ऊर्जा, कला और विचारों के संगम की साक्षी बनी। करीब सात साल बाद सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय को राज्य स्तरीय युवा उत्सव की मेजबानी का अवसर मिला। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन को युवाओं का ‘लघु कुंभ’ कहा जा रहा है, जहां शिक्षा, संस्कृति और रोजगार की दिशा एक साथ दिखाई दी। इस युवा उत्सव में केवल मंचीय प्रस्तुतियां ही नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा और करियर को लेकर भी गंभीर मंथन हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश, मंत्रियों की घोषणाएं और छात्रों की भागीदारी ने इस आयोजन को खास बना दिया।

महाकाल नगरी उज्जैन में राज्य स्तरीय युवा उत्सव का शुभारंभ

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय परिसर में गुरुवार को राज्य स्तरीय युवा उत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा और उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल मौजूद रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। पूरे परिसर में उत्साह का माहौल नजर आया। पारंपरिक सजावट, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और छात्रों की ऊर्जा ने यह साफ कर दिया कि उज्जैन में यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्सव का रूप ले चुका है।

सीएम मोहन यादव का वर्चुअल संबोधन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस समय असम के गुवाहाटी प्रवास पर थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने विश्वविद्यालयों में टेक्सटाइल जैसे रोजगारोन्मुख नए पाठ्यक्रम शुरू करने पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री का यह संदेश सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल और उससे जुड़े क्षेत्रों में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। अगर विद्यार्थी अभी से इन क्षेत्रों में कौशल सीखते हैं, तो उन्हें रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

‘लघु कुंभ’ क्यों कहा जा रहा है यह युवा उत्सव

उज्जैन संभाग के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आयोजित इस राज्य स्तरीय युवा उत्सव को ‘लघु कुंभ’ कहा जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी और विविधता। करीब 800 छात्र-छात्राएं मध्य प्रदेश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से यहां पहुंचे हैं। संगीत, नृत्य, नाटक, साहित्य और अन्य विधाओं में युवा अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। जैसे कुंभ में देशभर से लोग एक जगह इकट्ठा होते हैं, वैसे ही यह युवा उत्सव छात्रों का संगम बन गया है।

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की बड़ी घोषणाएं

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने इस अवसर पर कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने विश्वविद्यालय में ऑडिटोरियम या खेल मैदान निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। यह घोषणा छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। इसके साथ ही मंत्री परमार ने कहा कि आने वाले युवा उत्सवों में फोटोग्राफी, कोरियोग्राफी और मेहंदी जैसी प्रतियोगिताओं को भी शामिल किया जाएगा। इससे ज्यादा से ज्यादा छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार मंच मिलेगा।

13 भाषाओं की शिक्षा और नई इंडस्ट्री के अनुसार पाठ्यक्रम

इस युवा उत्सव में शिक्षा के भविष्य को लेकर भी साफ संकेत दिए गए। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि नई इंडस्ट्री की मांग को देखते हुए तकनीकी और रोजगार आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों में 13 भाषाओं की शिक्षा शुरू करने की योजना है। इससे छात्रों को बहुभाषी बनने का अवसर मिलेगा और वे देश-विदेश में बेहतर अवसर हासिल कर सकेंगे। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भी है।

सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज का युवाओं को संदेश

राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज ने युवाओं से शिक्षा के साथ नवाचार अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का समय केवल डिग्री लेने का नहीं, बल्कि नई सोच और नए प्रयोग करने का है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि युवा अगर अपनी प्रतिभा को पहचान लें और उसे सही दिशा में लगाएं, तो वे न केवल अपने लिए बल्कि समाज और देश के लिए भी कुछ बड़ा कर सकते हैं।

पर्यावरण और संसाधनों के संरक्षण पर भी फोकस

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विद्यार्थियों को बिजली, पानी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ संसाधनों की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है। युवा उत्सव जैसे मंचों पर इस तरह के संदेश देना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही युवा आने वाले समय में समाज की दिशा तय करेंगे।

7 साल बाद उज्जैन को क्यों मिला यह अवसर

करीब सात साल बाद उज्जैन संभाग को राज्य स्तरीय युवा उत्सव की मेजबानी का अवसर मिला है। विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसे गौरव का विषय बताया। इस आयोजन से न केवल विश्वविद्यालय की पहचान मजबूत होगी, बल्कि उज्जैन शहर को भी शैक्षणिक और सांस्कृतिक नक्शे पर नई पहचान मिलेगी। होटल, परिवहन और स्थानीय कारोबार को भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।