कर्ज केवल पैसों का बोझ नहीं होता, यह इंसान के मन पर भी भारी पड़ता है। कई परिवार ऐसे होते हैं जो सालों तक कर्ज और आर्थिक तनाव में जीते रहते हैं। ऐसे में जब लोग उम्मीद खोने लगते हैं, तब वे भगवान के दर पर पहुंचते हैं, नई शुरुआत की आस लेकर।
मध्य प्रदेश का धार्मिक शहर उज्जैन भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र शहरों में गिना जाता है। यहां हर कदम पर इतिहास, परंपरा और आस्था की गहरी छाप दिखाई देती है। यह शहर भगवान शिव की नगरी माना जाता है। यहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, लेकिन शिवरात्रि, सावन और अन्य पर्वों पर लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। उज्जैन की खास बात यह है कि यहां आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ जीवन की परेशानियों का समाधान खोजने की आस्था भी जुड़ी हुई है। ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर भी इसी आस्था की मजबूत कड़ी है, जहां लोग आर्थिक संकट से राहत की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं।
शिप्रा तट पर स्थित मंदिर का पवित्र वातावरण
यह प्राचीन शिव मंदिर पवित्र शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। सुबह के समय जब नदी के घाटों पर आरती होती है और मंदिर की घंटियों की आवाज गूंजती है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
हमने देखा कि कई श्रद्धालु पहले शिप्रा में स्नान करते हैं, फिर मंदिर में जाकर पूजा करते हैं। उनका मानना है कि स्नान और पूजा दोनों मिलकर जीवन के दुख और बाधाओं को दूर करने का मार्ग खोलते हैं। नदी किनारे की शांति, मंदिर का वातावरण और भक्तों का विश्वास इस स्थान को और भी खास बना देता है।
क्यों पड़ा नाम ऋणमुक्तेश्वर? क्या कहती है मान्यता
स्थानीय पुजारियों और श्रद्धालुओं के अनुसार, यहां वर्षों से यह मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से पूजा करता है, उसे कर्ज से राहत मिलने लगती है। इसलिए भगवान शिव को यहां “ऋणमुक्तेश्वर” कहा जाने लगा। कई श्रद्धालुओं के अनुभव बताते हैं कि पूजा के बाद उन्हें काम में सफलता मिलने लगी, आय के नए रास्ते खुले और धीरे-धीरे कर्ज चुकाने की स्थिति बन गई।
मंदिर की सबसे खास परंपरा: पीली पूजा
ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर की पहचान यहां होने वाली “पीली पूजा” से है। यह पूजा कर्ज से छुटकारा पाने की विशेष प्रार्थना मानी जाती है। इस पूजा में भक्त एक पीले कपड़े में चने की दाल, हल्दी और गुड़ बांधकर पोटली बनाते हैं। फिर इसे भगवान शिव के चरणों में अर्पित किया जाता है। मंदिर परिसर में जगह-जगह पीली पोटलियां दिखाई देती हैं, जो भक्तों के विश्वास की निशानी हैं। पुजारी मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराते हैं। भक्त मानते हैं कि इससे आर्थिक रुकावटें धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं।
महाशिवरात्रि पर बढ़ जाती है आस्था की भीड़
महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। दूर-दराज के राज्यों से लोग उज्जैन पहुंचते हैं और पूरी रात शिव भक्ति में लीन रहते हैं। हमने स्थानीय लोगों से बातचीत में जाना कि इस दिन की गई पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है। लोग परिवार के साथ आकर पूजा करते हैं और जीवन की परेशानियों से राहत की कामना करते हैं। मंदिर परिसर और घाटों पर भक्ति का अलग ही माहौल देखने को मिलता है।





