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उज्जैन में किसानों की फसल बचाने के लिए नया फैसला, अफ्रीकन बोमा पद्धति से किया जाएगा नीलगायों का रेस्क्यू

Written by:Diksha Bhanupriy
Published:
उज्जैन में चंदेसरा से लेकर नरवर तक के इलाके में नीलगायों से फसलों को बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। वन विभाग अब बोम पद्धति के जरिए इनका रेस्क्यू कर इन्हें शहर से बाहर छोड़ेगा।
उज्जैन में किसानों की फसल बचाने के लिए नया फैसला, अफ्रीकन बोमा पद्धति से किया जाएगा नीलगायों का रेस्क्यू

उज्जैन के ग्रामीण इलाकों में फसल खराब करने वाली नील गायों को अब जिले से बाहर छोड़ने का फैसला लिया गया है। वन विभाग की ओर से इस प्लानिंग के तहत चंदेसरा से नरवर तक का इलाका चुना गया है। ग्रामीणों की फसलों को बचाया जा सके इसी उद्देश्य से फैसला लिया गया है।

इन इलाकों में सर्वे शुरू कर नीलगाय की ट्रैकिंग की जा रही है। 8 10 या फिर इससे ज्यादा के झुंड में दिखाई देने वाले मवेशियों के रास्ते को चिन्हित कर लिया गया है। जल्द ही इन्हें रेस्क्यू कर जिले से बाहर छोड़ा जाएगा।

रेस्क्यू के लिए सेटअप तैयार

डीएफओ अनुराग तिवारी द्वारा दिखे जानकारी के मुताबिक रेस्क्यू के लिए पूरा सेटअप मंगवा लिया गया है। चिन्हित पॉइंट पर इन्हें इंस्टॉल करते हुए जल्द ही नील गायों को पकड़ने का रेस्क्यू शुरू किया जाएगा। मुझे बताया गया है कि इसके लिए अफ्रीकन बोमा पद्धति का उपयोग किया जाने वाला है। रेस्क्यू करने के बाद इन नीलगायों को जिले से बाहर सुरक्षित ले जाकर वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। किसने की फसलों को होने वाला नुकसान बचाया जा सके इसलिए रेस्क्यू टीम को प्रशिक्षित का तैयार किया गया है।

मंदसौर और शाजापुर में हो चुका है रेस्क्यू

नीलगायों का रेस्क्यू करने के लिए तकरीबन साथ-आठ साल पहले मंदसौर में इस पद्धति का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद शाजापुर जिले में भी यही पद्धति अपनाई गई और हिरणों का रेस्क्यू किया गया। इस दौरान कुछ नीलगाय भी पकड़ी गई थी। अब उज्जैन में इस पद्धति का उपयोग किया जाने वाला है। हालांकि, चुनौती इस बात की है कि जिन क्षेत्रों में रेस्क्यू किया जाने वाला है वह चारों तरफ से खुले हुए इलाके हैं। यहां बोमा सेटअप लगाकर जानवरों को वहां तक लाने में परेशानी होगी। नीलगाय है ताकतवर अफ्रीकन जानवर है जिसे कंट्रोल में करना मुश्किल है। ये रेस्क्यू का एक महंगा तरीका है जिसमें सेटअप लगाकर हेलीकॉप्टर से मवेशियों को हांका जाता है। इस वजह से उज्जैन में सेटअप लगाने के बाद हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल की जगह ढोल और अन्य चीजों का शोर करते हुए नीलगायों को टारगेट तक पहुंचाया जाएगा।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
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