मालवा की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले शहर में आज से उत्सव का माहौल बनने जा रहा है। प्राचीन परंपराओं और आधुनिक विकास की झलक दिखाने वाला विक्रम महोत्सव एक बार फिर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने को तैयार है। इस बार का आयोजन खास इसलिए भी है क्योंकि इसमें धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों को एक साथ जोड़ा गया है।
सुबह से ही श्रद्धालु और पर्यटक शहर की तैयारियों को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। पूरे आयोजन की शुरुआत प्रदेश के मुख्यमंत्री के हाथों होने जा रही है, जिससे कार्यक्रम को और भी महत्व मिल गया है। शहर की सड़कों से लेकर आयोजन स्थलों तक सजावट और तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
मुख्यमंत्री का दिनभर का कार्यक्रम
प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव आज सुबह राजधानी भोपाल में स्थित बड़वाले महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना से अपने दिन की शुरुआत करेंगे। सुबह 10 बजे मंदिर में विशेष पूजा का कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें प्रदेश की खुशहाली और विकास की कामना की जाएगी।
इसके बाद मुख्यमंत्री दोपहर 1:40 बजे डबरा पहुंचेंगे, जहां नवग्रह शक्तिपीठ में दर्शन और स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। वहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से मुलाकात के बाद वे शाम 4:15 बजे उज्जैन पहुंचेंगे। उज्जैन पहुंचते ही मुख्यमंत्री विक्रम महोत्सव और विक्रम व्यापार मेले का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
क्या है विक्रम महोत्सव और क्यों खास है इसका आयोजन
विक्रम महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उज्जैन की ऐतिहासिक पहचान और समृद्ध परंपराओं का उत्सव है। राजा विक्रमादित्य की नगरी उज्जैन सदियों से ज्ञान, ज्योतिष, धर्म और संस्कृति का केंद्र रही है। इसी गौरव को याद करने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के लिए हर वर्ष यह महोत्सव आयोजित किया जाता है।
इस आयोजन के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लोकनृत्य, संगीत कार्यक्रम, धार्मिक आयोजन और व्यापार मेले लगाए जाते हैं। स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता है और शहर में पर्यटन गतिविधियां भी तेज हो जाती हैं। बाहर से आने वाले पर्यटक उज्जैन के मंदिरों, घाटों और ऐतिहासिक स्थलों का भी भ्रमण करते हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों और होटल उद्योग को भी फायदा मिलता है।
इस बार विक्रम महोत्सव को और बड़ा स्वरूप देने की कोशिश की गई है ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक यहां पहुंचें और शहर की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हो सके।
विक्रम व्यापार मेला स्थानीय व्यापारियों के लिए बड़ी उम्मीद
विक्रम महोत्सव के साथ ही विक्रम व्यापार मेले का आयोजन भी किया जा रहा है। इसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों से व्यापारी और उद्योग से जुड़े लोग अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्प कलाकारों और छोटे उद्योगों को भी यहां अपना सामान प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा।
यह मेला केवल खरीदारी का केंद्र नहीं बल्कि स्थानीय उद्योगों को नई पहचान देने का माध्यम भी है। छोटे व्यापारियों को नए ग्राहक मिलते हैं और बड़े व्यापारिक समूहों को भी स्थानीय बाजार समझने का अवसर मिलता है। सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजनों से पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलते हैं और शहर की पहचान भी बढ़ती है।
उज्जैन में पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को मिलेगा नया बढ़ावा
उज्जैन पहले से ही धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र है, लेकिन अब कोशिश की जा रही है कि यहां सांस्कृतिक और आयोजन आधारित पर्यटन भी बढ़े। विक्रम महोत्सव इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
महोत्सव के दौरान शहर में बाहर से आने वाले लोगों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे होटल, परिवहन, खानपान और छोटे व्यापारियों की आय में भी वृद्धि होती है। प्रशासन ने भी यातायात, सुरक्षा और सफाई की खास व्यवस्था की है ताकि आने वाले पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजन शहर की पहचान को नई ऊंचाई देते हैं और युवाओं को भी अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। बच्चों और युवाओं के लिए भी यह एक सीखने का अवसर होता है कि उनका शहर कितनी समृद्ध परंपराओं वाला है।





