महाशिवरात्रि का पर्व आते ही देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है। कोई उज्जैन के महाकाल के दर्शन की तैयारी करता है तो कोई काशी जाने का संकल्प लेता है। लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के पास स्थित एक ऐसा शिव मंदिर भी है, जहां का रहस्य वर्षों से लोगों को हैरान करता आ रहा है।
यह मंदिर अपनी अद्भुत विशेषता के कारण हर साल चर्चा में आता है। यहां स्थापित शिवलिंग से समय-समय पर पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े टूटकर गिरते हैं, लेकिन आश्चर्य यह है कि इसके बावजूद शिवलिंग का आकार कभी छोटा नहीं हुआ। यही कारण है कि महाशिवरात्रि के समय यहां श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं।
महाशिवरात्रि पर देशभर के शिव मंदिरों में उमड़ती आस्था की लहर
महाशिवरात्रि पर भक्त देश के प्रमुख शिवधामों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर से लेकर वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर तक श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। शिवभक्त पूरी रात जागरण करते हैं, अभिषेक करते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद मांगते हैं।
इसी दौरान मध्य प्रदेश के इंदौर के पास मौजूद एक प्राचीन शिव मंदिर भी भक्तों को अपनी ओर खींचता है। यहां आने वाले श्रद्धालु केवल पूजा करने नहीं, बल्कि मंदिर से जुड़े रहस्य को देखने भी पहुंचते हैं।
देपालपुर के पास स्थित है रहस्यमयी नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर
इंदौर जिले के देपालपुर क्षेत्र के पास बसे काकवा गांव में स्थित नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर हजारों वर्ष पुराना माना जाता है। यह मंदिर ग्रामीण क्षेत्र में होने के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि चमत्कार और आस्था का संगम है। यहां आने वाले लोग बताते हैं कि मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही एक अलग तरह की शांति और श्रद्धा का अनुभव होता है।
महाशिवरात्रि के दिन यहां सुबह से ही भक्त जलाभिषेक के लिए कतार में खड़े दिखाई देते हैं। कई लोग रातभर भजन और पूजा करते हैं और मानते हैं कि यहां दर्शन करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं।
शिवलिंग से टूटते पत्थर, लेकिन आकार नहीं होता छोटा
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां का शिवलिंग है। मान्यता है कि सिंहस्थ काल के दौरान शिवलिंग से पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े निकलते हैं। कई लोगों ने इसे अपनी आंखों से देखने का दावा भी किया है।
सबसे आश्चर्य की बात यह है कि इतने वर्षों से पत्थर झड़ने के बावजूद शिवलिंग का आकार कभी छोटा नहीं हुआ। यही कारण है कि यह मंदिर रहस्य और आस्था का केंद्र बन गया है।
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह शिवलिंग स्वयंभू है, यानी इसे किसी ने स्थापित नहीं किया, बल्कि यह स्वयं भूमि से प्रकट हुआ। इसलिए भक्त इसे भगवान शिव की विशेष कृपा मानते हैं।
कई श्रद्धालु इस घटना को चमत्कार मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे प्राकृतिक प्रक्रिया बताते हैं। लेकिन सच्चाई जो भी हो, इस रहस्य ने मंदिर की पहचान को और मजबूत किया है।
महाशिवरात्रि पर भक्तों की उमड़ती भीड़ और खास पूजा
महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ शुरू हो जाती है। लोग दूध, जल, बेलपत्र और फूल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। कई भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और रातभर जागरण करते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। इसी विश्वास के कारण दूर-दूर से लोग यहां आते हैं।
मंदिर परिसर में मौजूद कुंड को भी चमत्कारी माना जाता है। श्रद्धालु यहां स्नान कर पूजा करते हैं। बरसात के मौसम में मंदिर के पीछे बहने वाली नदी का दृश्य भी लोगों को आकर्षित करता है।
मंदिर का धार्मिक महत्व और लोक मान्यताएं
मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता यह भी है कि यहां विराजमान भगवान नीलकंठेश्वर को मृत्युलोक के राजा महाकाल के चार द्वारपालों में से एक माना जाता है। यही कारण है कि इस मंदिर का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि पीढ़ियों से लोग यहां आकर पूजा करते आए हैं और कई परिवार अपनी परंपरा के रूप में हर साल दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर गांव के लोगों के जीवन का भी अहम हिस्सा है। हर धार्मिक आयोजन यहां सामूहिक रूप से मनाया जाता है, जिससे सामाजिक एकता भी मजबूत होती है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलता है लाभ
महाशिवरात्रि और अन्य त्योहारों के समय यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को भी लाभ मिलता है। भक्तों के लिए खाने-पीने और पूजा सामग्री की दुकानें लगती हैं। इससे गांव के लोगों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलता है। यदि इस स्थान को पर्यटन के रूप में और विकसित किया जाए, तो यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है।





