
Sanjay Gandhi Thermal Power Project Birsinghpur contractor protest
उमरिया कॉन्टैक्टर एसोसिएशन ने संजय गांधी ताप विद्युत परियोजना बिरसिंहपुर पाली में मेगा कॉन्ट्रैक्ट के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने केंद्रीय मंत्री, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय भारत सरकार को ज्ञापन सौंपकर लघु एवं सूक्ष्म ठेकेदारों और मजदूरों की आजीविका पर खतरा मंडराने की बात कही है।
एसोसिएशन का आरोप है कि बड़े कॉन्ट्रैक्ट को कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने से स्थानीय ठेकेदारों का काम प्रभावित होगा। सरकार का कहना है एमएसएमई के माध्यम से स्टार्टअप और नए उद्योगों को बढ़ावा देने की नीति पर जोर-शोर से काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारी अपने तानाशाही रवैया से छोटे ठेकेदारों और मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर रहे हैं।
मजदूरों के बेरोजगार होने की आशंका, सौंपा ज्ञापन
बिरसिंहपुर पाली में काम करने वाले ठेकेदारों द्वारा अपने और मजदूरों के हित को लेकर एक सौंपा, ज्ञापन में यह कहा गया है कि अगर मेगा कॉन्ट्रैक्ट को इसी तरह लागू किया गया तो सैकड़ों स्थानीय मजदूर बेरोजगार हो सकते हैं। ठेकेदारों का दावा है कि वर्षों से परियोजना में काम कर रहे स्थानीय लोगों को दरकिनार कर बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए।
कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लगाये आरोप
इधर, इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार पूंजीपतियों को बढ़ावा दे रही है और छोटे ठेकेदारों की अनदेखी कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह निर्णय सीधे तौर पर स्थानीय रोजगार पर प्रहार है। तो वहीं भाजपा नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा है कि उन्होंने भी ज्ञापन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को आगाह किया है। यदि मजदूरों और ठेकेदारों की रोजी-रोटी पर आंच आई तो वे भी चुप नहीं बैठेंगे और हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार स्थानीय ठेकेदारों की मांगों पर ध्यान देगी या फिर मेगा कॉन्ट्रैक्ट पर विवाद और गहराएगा? फिलहाल उमरिया में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

