फोटो खिंचा और बंद हो गई नल जल योजना, गंदा पानी पीने के लिए मजबूर आदिवासी, जिम्मेदार मौन

अब जब जिला प्रशासन के कानों तक ये खबर पहुंची है तो जिला प्रशासन के अधिकारी ठेकेदार एवं विभाग पर कार्यवाही की बात कर कर रह हैं ।
Umaria News

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इंदौर के जहरीले एवं गंदे दूषित पानी से हुई मौतों के मामले के बाद सरकार ने प्रदेश में पेयजल को लेकर गंभीरता बरतने के निर्देश दिए हैं बावजूद इसके कई जिलों में अधिकारी उदासीन हैं और लोग गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं एस अहि एक मामला उमरिया जिले से सामने आया है।

इंदौर के दूषित पानी का मामला अभी थमा नहीं है और उमरिया से ही ऐसी ही खबर सामने आई है, जिले के मानपुर विधानसभा के पर्यटन ग्राम के आदिवासी नल जल योजना होने के बाद भी नदी नाले का पानी पीने के लिए मजबूर है जिससे बीमारी फैलने की आशंका बन रही है, नदी नालों का पानी दूषित होने के साथ हानिकारक भी है मगर इससे जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

ये मामला उमरिया जिले के मानपुर विधानसभा के मरईखुर्द पंचायत का है जहां आदिवासी निवास करते हैं वहां के निवासियों ने बताया कि बरसात के दिनों में तो गंदा पानी का उपयोग करना पड़ता है लेकिन सूखे दिनों में भी हमारे यहां पानी की भारी समस्या है, ऐसा नहीं है कि सरकारों ने काम नहीं कराया लेकिन उसका फायदा नहीं मिल रहा ।

एक दिन फोटो खिंचा और बंद हो गई नल जल योजना 

आदिवासियों के मुताबिक नल जल योजना‌ केअंतर्गत 62 लाख रुपये की लागत से पाइप लाइन के माध्यम से घर-घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई गई मगर एक दिन ही चला कर फोटो खिंचवाकर उसे पर ताला चढ़ दिया गया एक से डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव वालों को आज तक योजना का पानी नहीं मिला लोग आज भी नदी नाले का गंदा पानी पीकर अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

जिला प्रशासन ने समस्या दूर करने का दिया आश्वासन 

अब जब जिला प्रशासन के कानों तक ये खबर पहुंची है तो जिला प्रशासन के अधिकारी ठेकेदार एवं विभाग पर कार्यवाही की बात कर कर रह हैं ।  बहरहाल देश के प्रधानमंत्री के सपनों को चकनाचूर करने में यहां के अधिकारी और कर्मचारी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है, घर-घर तक नल से जल पहुंचने के लिए उमरिया जिले में कई करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं लेकिन अभी तक योजना का लाभ आदिवासी और आमजन तक नहीं पहुंच सका है, लोग चिंता में हैं कि कहीं इंदौर जैसा कोई हदसा ना हो जाये ।

ब्रजेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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