
Umaria-Shahdol National Highway 43
उमरिया जिले से गुजरने वाला नेशनल हाईवे 43, जो क्षेत्र के विकास की रीढ़ माना जाता है, जो आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। लगभग 11 वर्षों का लंबा समय बीत जाने के बावजूद इस हाईवे का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है, जिससे आमजनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, यातायात बाधित होता है और लोगों का समय व आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है।
पूरा मामला उमरिया से लेकर शहडोल तक निकल रहे हाइवे नंबर 43 हाईवे का है इस हाईवे से रोजमर्रा के आवागमन में कठिनाई हो रही है, बल्कि व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी प्रभावित हो रही है। कई जगहों पर सड़क पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है, जिससे वाहन चालकों को जोखिम उठाकर सफर करना पड़ता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब सड़कें कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं।
11 साल से अधूरे पड़े नेशनल हाइवे को पूरा करने की मांग
इन्हीं समस्याओं को लेकर युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि इस लंबे समय से लंबित पड़े नेशनल हाईवे 43 के निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि इस दिशा में शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
युवक कांग्रेस के नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह केवल एक सड़क का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के विकास, लोगों की सुरक्षा और उनके अधिकारों का सवाल है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और इस प्रकार की लापरवाही को तुरंत समाप्त करना चाहिए।
युवा कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी
आंदोलन की रूपरेखा बताते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे नेशनल हाईवे पर चक्का जाम करेंगे और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति के लिए प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा।
युवक कांग्रेस ने सरकार से अपील की है कि जनता की परेशानियों को समझते हुए तत्काल कार्रवाई की जाए और नेशनल हाईवे 43 का निर्माण कार्य पूर्ण कर क्षेत्रवासियों को राहत दी जाए। यह समय है कि वादों को हकीकत में बदला जाए और विकास को जमीन पर उतारा जाए।
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