उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल विस्तार पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा तंज कसा है, जिससे राज्य की सियासत में गर्माहट आ गई है। रविवार (10 मई) को हुए इस विस्तार में छह नए मंत्रियों को शामिल किया गया और दो का प्रमोशन हुआ। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर कटाक्ष करते हुए लिखा कि ‘समय बिताने के लिए करना है कुछ काम!’
उन्होंने आगे कहा कि वैसे भी मंत्रिमंडल के विस्तार में इनका कोई वास्तविक काम नहीं होता, क्योंकि ‘उधर से पर्ची आएगी, यहां तो सिर्फ पढ़ी जाएगी।’ समाजवादी पार्टी प्रमुख ने भाजपा शासन पर निशाना साधते हुए कहा कि इस दौर में मुख्यमंत्री का मतलब केवल ‘कूरियर-मैसेंजर’ तक ही सीमित रह गया है। अखिलेश यादव की यह टिप्पणी योगी सरकार के कामकाज के तरीके पर सीधा हमला मानी जा रही है।
अखिलेश यादव ने जनता की ओर से सवाल उठाते हुए कहा कि लोग पूछ रहे हैं कि क्या फिल्म सबसे आगे बैठकर देखेंगे या पीछे बैठकर? उन्होंने जनता की ओर से अनुरोध करते हुए कहा कि फिल्म को ध्यान से देखिएगा, क्योंकि ‘हो सकता है ‘कर्मफल-कंसफल’ का सिद्धांत समझकर कुछ जागरण हो जाए और कुछ अच्छा बदलाव भी हो जाए।’ इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने भाजपा सरकार के कामकाज और उसके परिणामों पर परोक्ष रूप से हमला किया, साथ ही जनता को भी सरकार के निर्णयों पर बारीकी से नज़र रखने का संदेश दिया।
बुराई इंसान को और अधिक बुरा बनाती है: अखिलेश यादव
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अखिलेश यादव ने मानवीय स्वभाव और राजनीति में नैतिकता पर गहरा चिंतन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि मूल रूप से व्यक्ति नहीं, बल्कि उसका ‘लालच-लोभ’ ही बुरा होता है, जो धीरे-धीरे उसके आचरण में दुराचार बन जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बुराई इंसान को और अधिक बुरा बनाती जाती है। इसके विपरीत, उन्होंने एक सकारात्मक पहलू भी उजागर किया और कहा कि यह भी सच है कि जब कोई व्यक्ति ‘स्वार्थ’ को छोड़कर ‘परमार्थ’ के मार्ग पर चल निकलता है, तो उसके भीतर सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है और वह मानवता के लिए सार्थक साबित हो सकता है।
अखिलेश यादव ने महाकाव्यों के आंतरिक संदेशों का किया जिक्र
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने महाकाव्यों के गहरे आंतरिक संदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि अपने अंदर की सौ बुराइयों के ऊपर चंद अच्छाइयां भी जीत हासिल कर सकती हैं। उन्होंने प्रायश्चित के महत्व पर भी प्रकाश डाला। अखिलेश यादव ने कहा कि अपनी गलतियों और दुर्भावनाओं के लिए प्रायश्चित करने का कोई निश्चित स्थान नहीं होता है; इसके लिए व्यक्ति के भीतर का प्रकाश चाहिए, जो सैकड़ों लोगों के बीच ‘अंधेरे बंद परिसर’ में भी जागृत हो सकता है। इन दार्शनिक टिप्पणियों के माध्यम से उन्होंने सरकार को आत्मनिरीक्षण और सुधार का संदेश देने का प्रयास किया, साथ ही राजनीतिक शुचिता पर भी अपनी राय रखी।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अपने मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार करके राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को साधने का एक बड़ा संदेश दिया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जन भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में छह नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई, जबकि दो राज्यमंत्रियों को पदोन्नत (प्रमोट) किया गया।
योगी कैबिनेट में छह नए मंत्री शामिल
इस विस्तार में सबसे पहले पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने मंत्री पद की शपथ ली। उनके बाद समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए मनोज पांडेय को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। इनके अतिरिक्त, सुरेंद्र दिलेर, कृष्णा पासवान, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश राजपूत जैसे नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की। यह विस्तार भाजपा की भविष्य की रणनीतियों और चुनावी तैयारियों का संकेत माना जा रहा है, जिसमें विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है।
समय बिताने के लिए करना है कुछ काम!
वैसे भी मंत्रिमंडल के विस्तार में तो इनका कोई काम है नहीं। उधर से पर्ची आएगी, यहाँ तो सिर्फ़ पढ़ी जाएगी। भाजपा राज में वैसे भी CM का मतलब बस यही रह गया है : Courier-Messenger.
वैसे जनता पूछ रही है कि फ़िल्म सबसे आगे बैठकर देखेंगे या पीछे…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 10, 2026






