तमिलनाडु की राजनीति में ‘विजय सरकार’ के गठन ने एक नया अध्याय जोड़ दिया है, जहां थलपति विजय ने राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बीच, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की जमकर सराहना की है। तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि स्टालिन ने खुद विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद, थलपति विजय को मुख्यमंत्री बनाने और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की सरकार बनवाने में सक्रिय सहयोग दिया।
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में एमके स्टालिन के राजनीतिक कद को रेखांकित करते हुए कहा कि जब भी देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं की सूची बनेगी, उसमें स्टालिन का नाम अवश्य शामिल होगा। उन्होंने स्टालिन को ‘क्या ही नेता’ बताते हुए उनकी दूरदर्शिता और राजनीतिक सूझबूझ की तारीफ की। तेजस्वी के अनुसार, स्टालिन ने व्यक्तिगत चुनावी हार को एक तरफ रखकर, TVK प्रमुख सी जोसेफ विजय को समर्थन देने के लिए दो विधायकों को राजी किया, जिससे उनकी पार्टी बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में सफल रही। इस सहयोग के बाद ही विजय के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो सका।
तेजस्वी यादव ने भाजपा पर साधा निशाना
आरजेडी नेता ने इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर स्टालिन की जगह बीजेपी का कोई नेता होता, तो वह शायद विजय की पार्टी के नेताओं को खरीदने की कोशिश कर रहा होता। तेजस्वी यादव ने देश की सभी राजनीतिक पार्टियों को एमके स्टालिन से सीखने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति में हमेशा दांव-पेंच नहीं चलाने चाहिए, बल्कि कभी-कभी बड़े उद्देश्यों के लिए सहयोग और त्याग की भावना भी रखनी चाहिए।
रविवार को विजय ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ
यह राजनीतिक घटनाक्रम तमिलनाडु में सी जोसेफ विजय के रविवार, 10 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ शुरू हुआ। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में आयोजित एक रंगारंग समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस शपथ ग्रहण समारोह ने राज्य में एक नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की।
TVK ने कैसे छुआ बहुमत का जादुई आंकड़ा?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में, थलपति विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर जीत हासिल की थी, जिससे वह प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि, सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत का आंकड़ा 118 था, और TVK इस आंकड़े से 10 सीट पीछे रह गई थी। विजय ने खुद चेन्नई की पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व, दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ी, जिसके परिणामस्वरूप पार्टी का आंकड़ा घटकर 107 रह गया था।
बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए TVK को अन्य पार्टियों के समर्थन की आवश्यकता थी। सबसे पहले, पार्टी को कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन मिला। इसके बाद, सीपीआई (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया) के दो विधायकों और सीपीआई-एम (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी) के दो विधायकों ने भी TVK को अपना समर्थन दिया। इस समर्थन से TVK की कुल ताकत बढ़कर 116 तक पहुंच गई, जो बहुमत के आंकड़े से सिर्फ दो कम थी।
सरकार गठन की दिशा में निर्णायक कदम शनिवार, 9 मई को उठाया गया, जब थलपति विजय ने विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK) के चार विधायकों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के एक विधायक का समर्थन हासिल कर लिया। इस नए समर्थन के साथ, 234 सदस्यीय विधानसभा में TVK और उसके सहयोगी दलों का आंकड़ा 116 से बढ़कर 121 हो गया, जो बहुमत के लिए आवश्यक 118 सीटों से कहीं अधिक था। इस प्रकार, विजय की पार्टी ने सफलतापूर्वक सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की।
यह पूरा घटनाक्रम, तेजस्वी यादव के बयानों के साथ, तमिलनाडु की राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ लेकर आया है, जहां व्यक्तिगत चुनावी परिणामों से परे जाकर राजनीतिक सहयोग और रणनीतियों का प्रदर्शन हुआ है।
जब भी देश में सबसे ज्यादा प्रभावशाली नेताओं की लिस्ट बनेगी उसमें MK STALIN का नाम जरूर होगा
क्या ही नेता है स्टालिन, खुद चुनाव हार गया लेकिन THALAPATHY VIJAY की सरकार बनवाने में खुद आगे आया
2 विधायकों को TVK प्रमुख को समर्थन देने के लिए राजी किया और बहुमत के आंकड़े तक पहुंचा… pic.twitter.com/zUGc3eoDaZ
— Tejashwii Yadav (@TejashwiYdvRJD) May 10, 2026






