उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश अब देश और आसपास के राज्यों के लगभग 35 करोड़ लोगों के लिए एक बड़े स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभर चुका है। लखनऊ में आयोजित ‘UP हेल्थटेक कॉन्क्लेव 1.0’ के मंच से उन्होंने कहा कि पिछले पौने नौ वर्षों में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में हुए व्यापक बदलाव का असर अब जमीन पर दिखने लगा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर व्यक्ति को समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और भविष्य की योजनाओं पर भी विस्तार से बात की।
दोगुने से ज्यादा हुए मेडिकल कॉलेज
सीएम योगी ने स्वास्थ्य ढांचे में हुए बदलावों का ब्योरा देते हुए कहा, “वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर करीब 40 मेडिकल कॉलेज ही थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 81 तक पहुंच गई है।” उन्होंने बताया कि इसके साथ ही दो AIIMS, जिला अस्पतालों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC/CHC) के नेटवर्क को भी लगातार मजबूत किया गया है।
“हमारा उद्देश्य केवल इमारतें खड़ी करना नहीं रहा, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना रहा है, जिससे आम व्यक्ति को समय पर इलाज मिल सके।” — योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
हर गरीब तक इलाज की पहुंच
मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का जिक्र करते हुए कहा कि आज करोड़ों परिवारों को गोल्डन कार्ड के जरिए मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि जो परिवार किसी कारणवश आयुष्मान भारत योजना में शामिल नहीं हो पाए, उन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कवर किया गया है। सीएम योगी ने कहा, “पहले गंभीर बीमारी की स्थिति में गरीब परिवार इलाज को लेकर असहाय महसूस करता था, लेकिन अब सरकारी अस्पतालों में बिना किसी भेदभाव के चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है।”
सुधरे स्वास्थ्य संकेतक, अब तकनीक पर जोर
अपने संबोधन में सीएम योगी ने स्वास्थ्य संकेतकों में आए सुधार पर भी बात की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है और संस्थागत प्रसव का स्तर राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंच गया है। कई जिलों में टीबी नियंत्रण की स्थिति में भी काफी सुधार दर्ज हुआ है।
भविष्य की योजनाओं पर उन्होंने कहा कि अब सरकार तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा जोर दे रही है। गांव स्तर पर स्क्रीनिंग, टेलीकंसल्टेशन और डिजिटल माध्यमों से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मरीज को किस स्तर की चिकित्सा की जरूरत है, ताकि उसे अनावश्यक रूप से अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके अलावा, प्रदेश को मेडिकल डिवाइस पार्क और बल्क ड्रग फार्मा पार्क के जरिए हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर का एक बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में भी काम जारी है।





