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गोरखपुर को मिली ₹721 करोड़ की सीवरेज परियोजना, Amrit 2.0 से 17 वार्डों के 2 लाख लोगों को मिलेगा फायदा

Written by:Banshika Sharma
Published:
गोरखपुर में अमृत-2.0 योजना के तहत ₹721.40 करोड़ की बड़ी सीवरेज परियोजना को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। इस प्रोजेक्ट से नगर निगम के 17 वार्डों की करीब 2 लाख आबादी को फायदा होगा और शहर में सीवेज प्रबंधन मजबूत बनेगा।
गोरखपुर को मिली ₹721 करोड़ की सीवरेज परियोजना, Amrit 2.0 से 17 वार्डों के 2 लाख लोगों को मिलेगा फायदा

उत्तर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर के शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘अटल नवीकरण और शहरी रूपान्तरण मिशन-2.0’ (अमृत-2.0) के तहत ₹721.40 करोड़ की सीवरेज परियोजना को मंजूरी दे दी गई। इस परियोजना का सीधा लाभ नगर निगम क्षेत्र के 17 वार्डों में रहने वाली लगभग दो लाख की आबादी को मिलेगा।

यह परियोजना शहर में सीवेज प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था को बेहतर बनाने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार की गई है। इसके लागू होने से न केवल स्वच्छता की स्थिति में सुधार होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

17 वार्डों को मिलेगी सीवेज लाइन से मुक्ति

इस योजना के तहत, नगर निगम के जोन-ए-3 के 17 वार्डों को कवर किया जाएगा। इन क्षेत्रों में सीवेज की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी। परियोजना के क्रियान्वयन के बाद, 43,604 घरों को सीवेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे 1,95,947 लोगों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचेगा। घरों से निकलने वाले गंदे पानी का उचित प्रबंधन और ट्रीटमेंट किया जाएगा, जिससे भूजल और नदियों को प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा।

केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी खर्च

परियोजना की कुल अनुमोदित लागत ₹721.40 करोड़ है, जिसमें जीएसटी और सेंटेज की राशि भी शामिल है। इसके वित्तीय ढांचे को केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय के बीच बांटा गया है।

परियोजना की लागत में केंद्र सरकार का हिस्सा ₹231.35 करोड़ और राज्य सरकार का हिस्सा ₹435.00 करोड़ होगा। वहीं, स्थानीय निकाय को ₹27.76 करोड़ का अंशदान करना होगा। एक महत्वपूर्ण फैसले में, राज्य सरकार ने परियोजना पर लगने वाले ₹27.28 करोड़ के सेंटेज की पूरी राशि खुद वहन करने का निर्णय लिया है।

बेहतर शहरी जीवन की ओर एक कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना गोरखपुर में शहरी जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। व्यवस्थित सीवेज नेटवर्क से जलभराव की समस्या कम होगी और बीमारियों का खतरा भी घटेगा। यह योजना एक स्वच्छ और टिकाऊ शहर के निर्माण के लक्ष्य को पूरा करने में सहायक होगी।