कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी एक बार फिर कानूनी दांवपेच में उलझ गए हैं, इस बार मामला आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़ा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति मामले में दायर एक याचिका की पत्रावली को सील करने का अहम निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस पत्रावली को सुरक्षित अभिरक्षा में रखने का आदेश दिया है। यह आदेश 6 मई को न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने पारित किया था, जिसे बृहस्पतिवार को अपलोड किया गया।
लखनऊ बेंच ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की दलीलों को विस्तार से सुनने के बाद न्यायालय को यह उचित लगा कि इस पेपर-बुक को न्यायालय के वरिष्ठ रजिस्ट्रार की सुरक्षित अभिरक्षा में रखा जाए और इसे विधिवत सील कर दिया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की अगली सुनवाई की तारीख को इस न्यायालय के बेंच सचिव द्वारा ही सील खोली जाएगी। इस महत्वपूर्ण फाइल को चैंबर में ही सील कर दिया जाएगा, ताकि इसकी गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। राहुल गांधी से जुड़े इस मामले में अगली सुनवाई 12 मई को दोपहर 2.15 बजे चैंबर में होनी तय हुई है।
राहुल गांधी के खिलाफ CBI जांच की मांग
यह आदेश एक आपराधिक याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें लोकसभा सांसद और रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र से प्रतिनिधि राहुल गांधी के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से कथित रूप से अधिक संपत्ति के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा विस्तृत जांच और नियमित मामला (आरसी) दर्ज करने की मांग की गई है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988/2018 के तहत यह याचिका दायर की गई है।
भाजपा कार्यकर्ता ने दायर की है याचिका
याचिका कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दायर की है। याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में सीबीआई निदेशक, नई दिल्ली, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग, गृह मंत्रालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय को प्रतिवादी बनाया है। यह दर्शाता है कि मामले की गंभीरता और इसमें कई केंद्रीय एजेंसियों की संभावित संलिप्तता कितनी व्यापक हो सकती है।
हाल ही में, 6 मई को, याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने वर्तमान रिट याचिका के अभिलेखों को सुरक्षित अभिरक्षा में रखने के लिए एक अर्जी दाखिल की थी। न्यायालय ने इस अर्जी को रिकॉर्ड पर ले लिया और इसे स्वीकार करते हुए पत्रावली सील करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष विस्तृत तर्क प्रस्तुत किए, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ लगे आरोपों को पुख्ता करने का प्रयास किया गया।
हालांकि, प्रतिवादियों के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि उन्हें इस मामले में अभी तक पूर्ण निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। उन्होंने न्यायालय से निर्देश प्राप्त करने के लिए कुछ समय देने का अनुरोध किया। प्रतिवादी पक्ष के वकीलों ने यह भी कहा कि यदि संभव हो, तो वे लिखित निर्देश प्राप्त कर सकते हैं ताकि याचिकाकर्ता की दलीलों से न्यायालय को उचित रूप से अवगत कराया जा सके और वे प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रख सकें।
मामले में 12 मई को अगली सुनवाई
इन दलीलों और अनुरोधों पर विचार करने के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उक्त आदेश पारित किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले को 12 मई को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। राहुल गांधी के लिए यह मामला एक और कानूनी चुनौती पेश कर रहा है, और आने वाली सुनवाई में क्या मोड़ आता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। न्यायालय ने सभी पक्षों को पर्याप्त समय देने का निर्णय लिया है ताकि न्याय प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ सके।





