उत्तर प्रदेश के बनारस जिला प्रशासन द्वारा मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलाये जाने के बाद से सियासत तेज हो गई, कांग्रेस ने इसे लेकर भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है, इंदौर होलकर घराने की महारानी अहिल्याबाई द्वारा बनवाये गए घाट को तोड़े जाने और मूर्तियों को नष्ट किये जाने पर कांग्रेस ने कहा कि BJP सरकार न सिर्फ बनारस के इतिहास को मिटाने पर तुली हुई है, बल्कि वह हमारी धार्मिक भावनाओं पर भी हमला कर रही है।
बनारस के मणिकर्णिका घाट पर बनारस जिला प्रशासन विकास कार्य करा रहा है जिसके तहत प्रशासन का बुलडोजर घाट के आसपास चल रहा है, इसी काम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसने बवाल मचा दिया है और सियासत गरमा दी है, वायरल वीडियो में कुछ मूर्तियाँ टूटी हुई और पानी में गिरी हुई दिख रही है, लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने देवी अहिल्याबाई की मूर्ति सहित सैकड़ों साल पुरानी विरासत को नष्ट कर दिया है जो गलत है
उधर कांग्रेस ने भी इस मामले में भाजपा सरकार पर हमला बोला है, कांग्रेस ने वायरल वीडियो और कुछ तस्वीरें X पर पोस्ट करते हुए लिखा-“मोदी सरकार ने व्यवसायीकरण के बहाने बनारस में सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को बुल्डोज कर तबाह कर दिया है। बनारस के जिस मणिकर्णिका घाट का पुनरुद्धार लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी ने करवाया था, उसे ‘रिनोवेशन’ के नाम पर उजाड़ देना घोर पाप है।”
कांग्रेस ने लिखा- “काशी- अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास का संगम है। यहां की जा रही इस तबाही को विकास नहीं, विनाश का दर्जा मिलेगा। BJP सरकार न सिर्फ बनारस के इतिहास को मिटाने पर तुली हुई है, बल्कि वह हमारी धार्मिक भावनाओं पर भी हमला कर रही है। भोंडे सौंदर्यीकरण के नाम पर काशी की ऐतिहासिक पहचान को मिटाने के लिए- ये देश नरेंद्र मोदी को कभी माफ नहीं करेगा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी वीडियो और तस्वीरें X पर शेयर की और लिखा- “नरेंद्र मोदी जी, भोंडे सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर आपने बनारस के मणिकर्णिका घाट में बुलडोज़र चलवाकर सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को ध्वस्त कराने का काम किया है। आप चाहतें हैं कि इतिहास की हर धरोहर को मिटाकर बस अपना नेम-प्लेट चिपका दिया जाएँ।”
कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया बड़ा आरोप
“पहले कॉरिडोर के नाम पर छोटे-बड़े मंदिर और देवालय तोड़े गए और अब प्राचीन घाटों की बारी है। गुप्त काल में वर्णित जिस मणिकर्णिका घाट, जिसका लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी ने पुनरुद्धार करवाया उस दुर्लभ प्राचीन धरोहर को आपने Renovation के बहाने तुड़वाने का अपराध किया है। काशी, दुनिया का प्राचीनतम शहर अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास का ऐसा संगम है जो पुरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है। क्या इस सब के पीछे फिर से व्यावसायिक मित्रों को फ़ायदा पहुँचाने की मंशा है? जल, जंगल, पहाड़, सब आपने उनके हवाले किए हैं, अब सांस्कृतिक विरासत की बारी आ गई है।”
मूर्तियों को मलबे में डालने को लेकर कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा देश की जनता के आपसे दो सवाल हैं पहला- जीर्णोद्धार, साफ़-सफ़ाई और सौंदर्यीकरण विरासत को सहेज कर भी हो सकता था? पूरे देश को याद है संसद परिसर से आपकी सरकार ने किस तरह से महात्मा गाँधी, बाबासाहेब आंबेडकर समेत भारत की महान हस्तियों की प्रतिमाओं को बिना किसी राय-मशवरे के एक कोने में रखवा दिया। जलियाँवाला बाग़ मेमोरियल की दीवारों से इतिहास से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को इसी Renovation के नाम पर मिटाया गया। दूसरा मणिकर्णिका घाट में बुलडोज़र का शिकार बनी सैंकड़ों साल पुरानी मूर्तियों पर कुल्हाड़ी चलाकर उन्हें मलबे में क्यों डाला गया, किसी म्यूजियम में सँभाल कर रखा जा सकता था?”
कांग्रेस ने पीएम से कहा- आज आपने माँ गंगा को भुला दिया
अपनी पोस्ट के अंत में खड़गे ने लिखा- “आपने दावा किया था- “माँ गंगा ने बुलाया है” आज आपने माँ गंगा को भुला दिया है। बनारस के घाट बनारस की पहचान हैं। क्या आप इन घाटों को जनता की पहुँच से दूर करना चाहते हैं? लाखों लोग हर वर्ष काशी मोक्ष प्राप्ति के लिए अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में आते हैं। क्या आपकी मंशा इन श्रद्धालुओं से विश्वासघात करने की है ?”
बनारस जिला प्रशासन ने दी ये सफाई
हालाँकि बनारस जिला प्रशासन ने इस मामले में सफाई भी दी है, DM सत्येंद्र कुमार के मुताबिक मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार के लिए लोगों की भारी संख्या रहती है उन्हें परेशानी आती है वहां जगह की कमी, गंदगी और अव्यवस्था जैसी समस्याएं थीं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए घाट के पुनर्विकास की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि पुराने घाट की सीढ़ियों और कच्चे हिस्से का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा देवी अहिल्याबाई होलकर की मूर्तियों और अन्य कलाकृतियों को संस्कृति विभाग द्वारा सुरक्षित रख लिया गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इन्हें पूरे विधि-विधान से उसी स्थान पर पुनः स्थापित किया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि किसी भी मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है और सभी ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए ही विकास कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है।





