
मेरठ के सरधना विधानसभा क्षेत्र के कपसाड़ और सलावा गांवों में सम्राट मिहिर भोज के नाम पर लगे जाति दर्शाने वाले बोर्डों को लेकर विवाद फिर से गरमा गया है। हाईकोर्ट और राज्य सरकार के आदेश के बाद मंगलवार को प्रशासन ने शहर और देहात के विभिन्न हिस्सों से इन बोर्डों को हटाना शुरू कर दिया। प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि दोबारा ऐसे बोर्ड लगाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
गुर्जर महापंचायत के आयोजन के दौरान रविवार को हिंसक घटनाएं हुईं, जिसमें पुलिस पर पथराव किया गया। इस घटना में 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें मुख्य आरोपी अभिनव मोतला भी शामिल हैं। पथराव में एक उप निरीक्षक और एक कांस्टेबल घायल हो गए। पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया।
गुर्जर स्वाभिमान पंचायत बुलाई
कपसाड़ गांव में सम्राट मिहिर भोज के नाम के आगे क्षत्रिय लिखे बोर्ड को लेकर अभिनव मोतला ने गुर्जर स्वाभिमान पंचायत बुलाई थी। उन्होंने सोशल मीडिया और गांव-गांव संपर्क के जरिए 21 सितंबर को दादरी में पंचायत के लिए लोगों को जुटाने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने इसका समर्थन नहीं किया। दादरी पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें गांव में प्रवेश से रोक दिया, जिसके बाद पथराव की घटना हुई।
सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट
सांसद चंद्रशेखर ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर सरकार और जातिवाद पर सवाल उठाए हैं। प्रशासन ने दादरी, शाहपुर जदीद और अन्य गांवों से विवादित बोर्ड हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है, ताकि आगे किसी भी विवाद से बचा जा सके। इस कार्रवाई से यह संदेश दिया गया है कि जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर अब कोई रियायत नहीं होगी।
