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ऊर्जा मंत्री के घर पहुंची बिजली कर्मचारियों की भीड़, निजीकरण और उत्पीड़न के खिलाफ घंटों दिया धरना

Written by:Saurabh Singh
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बड़ी संख्या में कर्मचारी मंत्री आवास के बाहर जुटने लगे थे। इनकी मांग थी कि ऊर्जा मंत्री कर्मचारियों से मिलें और समझौते के वादों को पूरा करें। जब मंत्री ने मिलने से इनकार कर दिया, तो प्रदर्शन और आक्रोश बढ़ गया।
ऊर्जा मंत्री के घर पहुंची बिजली कर्मचारियों की भीड़, निजीकरण और उत्पीड़न के खिलाफ घंटों दिया धरना

उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने मंगलवार को राजधानी लखनऊ में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के सरकारी आवास का घेराव किया। प्रदर्शनकारी निजीकरण और कर्मचारियों पर किए जा रहे कथित उत्पीड़न के विरोध में एकजुट हुए। करीब चार घंटे तक मंत्री आवास के बाहर जमकर नारेबाजी हुई। इस दौरान मंत्री एके शर्मा घर में ही फंसे रहे और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए बाहर निकले।

“निजीकरण वापस लो” के नारे लगे

सुबह से ही बड़ी संख्या में कर्मचारी मंत्री आवास के बाहर जुटने लगे थे। इनकी मांग थी कि ऊर्जा मंत्री कर्मचारियों से मिलें और समझौते के वादों को पूरा करें। जब मंत्री ने मिलने से इनकार कर दिया, तो प्रदर्शन और आक्रोश बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने “उत्पीड़न बंद करो” और “निजीकरण वापस लो” जैसे नारे लगाए। सूचना मिलते ही मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया। हालात इस कदर बिगड़े कि मंत्री को घर से बाहर निकालने के लिए रस्सियों की मदद से रास्ता बनाना पड़ा।

समझौते से मुकरने का आरोप

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने ऊर्जा मंत्री पर आरोप लगाया कि उन्होंने 3 दिसंबर 2022 और 19 मार्च 2023 को जो लिखित समझौते किए थे, अब उनसे मुकर रहे हैं। दुबे के मुताबिक, मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान की गई सभी कार्रवाईयां वापस लेने का वादा किया गया था, लेकिन न सिर्फ वह वादा पूरा नहीं हुआ, बल्कि अब कर्मचारियों का दोबारा उत्पीड़न शुरू हो गया है।

ये रखी गईं प्रमुख मांगें

  • बर्खास्त संविदा कर्मियों की बहाली की जाए
  • उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए तबादले रद्द हों
  • विजिलेंस जांच और दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं
  • फेशियल अटेंडेंस के नाम पर रोका गया वेतन जारी किया जाए
  • बिजली कर्मचारियों के घरों पर मीटर लगाने की कार्रवाई रोकी जाए
  • निजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह निरस्त की जाए

विरोध प्रदर्शन में शैलेंद्र दुबे के अलावा जितेंद्र सिंह गुर्जर, जूनियर इंजीनियर्स संगठन के अध्यक्ष अजय कुमार, महेंद्र राय, पीके दीक्षित, सुहेल आबिद, श्रीचंद, दीपक चक्रवर्ती, सरजू त्रिवेदी, आशीष त्रिपाठी, राम सहारे वर्मा, केएस रावत, आरसी पाल, सुमित श्रीवास्तव, चंद्रशेखर और संतोष कुमार विश्वकर्मा समेत कई कर्मचारी नेता शामिल हुए। बिजली कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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Saurabh Singh
लेखक के बारे में
राजनीति में गहरी रुचि. खबरों के विश्लेषण में तेज और राजनीतिक परिस्थितियों की समझ रखते हैं. देश-दुनिया की घटनाओं पर बारीक नजर और फिर उसे खबरों के रूप में लिखने के शौकीन हैं. View all posts by Saurabh Singh
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