उत्तर प्रदेश की सियासत में चायल विधायक पूजा पाल के समाजवादी पार्टी (सपा) से निष्कासन के बाद नया मोड़ आया है। रविवार को पूजा पाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की, जिसके बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। खबर है कि भाजपा उन्हें आगामी पंचायत चुनावों में पिछड़ा वर्ग का प्रमुख चेहरा बनाकर एक महत्वपूर्ण पद दे सकती है। पूजा पाल के इस कदम ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।
पूजा पाल ने हाल ही में विधानसभा के ‘विजन 2047’ सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कानून-व्यवस्था नीतियों की तारीफ की थी। उन्होंने माफिया अतीक अहमद को अपने पति राजू पाल की 2005 में हुई हत्या का जिम्मेदार बताते हुए कहा कि योगी सरकार ने उन्हें न्याय दिलाया। इस बयान से नाराज सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों का हवाला देकर तत्काल निष्कासित कर दिया। पूजा की सीएम से मुलाकात ने उनके भाजपा में जाने की संभावनाओं को और पुख्ता किया है।
भाजपा को मिलेगा सियासी लाभ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूजा पाल के भाजपा में शामिल होने से पार्टी को कई स्तरों पर फायदा हो सकता है। पूजा पाल पिछड़ी जाति से आती हैं, और सपा की ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के जवाब में भाजपा उन्हें एक मजबूत चेहरा बनाकर सामाजिक और भावनात्मक लाभ उठा सकती है। साथ ही, यह कदम भाजपा को अपराध और माफिया के खिलाफ अपनी सख्त नीतियों को रेखांकित करने का मौका देगा। पूजा पाल का प्रभाव कौशांबी और प्रयागराज जैसे क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति को मजबूत कर सकता है।
पूजा पाल ने ठुकराया तत्काल भाजपा जॉइन करने का दावा
हालांकि, पूजा पाल ने रविवार को दावा किया कि वह अभी भाजपा में शामिल नहीं हो रही हैं और अपनी अगली राजनीतिक रणनीति के लिए पाल समुदाय से चर्चा करेंगी। उन्होंने कहा कि वह अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा से जुड़ी थीं, जो माफिया को दूर रखती थी। फिर भी, उनकी सीएम योगी से मुलाकात और अतीक अहमद के खिलाफ उनके बयानों ने साफ कर दिया है कि उनका झुकाव भाजपा की ओर है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूजा पाल जल्द ही भाजपा में शामिल होकर एक नई भूमिका निभा सकती हैं।





