राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा दावा, बोले – ‘हमें पहले से ही इसकी जानकारी थी’

ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर बड़ा दावा किया है। दरअसल उन्होंने कहा, "यह कोई नई बात नहीं है, हमें तो पहले से ही इसकी जानकारी थी।"
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा दावा, बोले - 'हमें पहले से ही इसकी जानकारी थी'

अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण को लेकर जहां पूरे देश में आस्था और उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी ओर ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। दरअसल उन्होंने साफ कहा कि राम मंदिर में चोरी कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह बहुत पहले से होती आ रही है। शंकराचार्य का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था और दान के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

दरअसल शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर जनजागरण अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में वे बागपत के बड़ौत पहुंचे, जहां उन्होंने गौ संरक्षण के लिए लोगों से आगे आने की अपील की। इस दौरान जब उनसे राम मंदिर ट्रस्ट और सनातन परंपरा से जुड़े सवाल पूछे गए, तो उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “राम मंदिर में चोरी कोई नई बात नहीं है। आप लोगों ने इसे अब उठाया है, लेकिन वहां चोरी तो बहुत पहले से ही हो रही है।” उनका यह बयान राम मंदिर के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

पूत के लक्षण पालने में दिख जाते हैं: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने दावे के पीछे वजह भी बताई। उन्होंने कहा, “पूत के लक्षण पालने में दिख जाते हैं।” उनका इशारा मंदिर निर्माण के समय ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया की ओर था। शंकराचार्य ने कहा कि जब कोई बड़ा काम किया जाता है, तो उसमें विशेषज्ञों की राय ली जाती है। राम मंदिर के मामले में भी चार शंकराचार्य और 13 अखाड़ों के प्रमुख पहले से तैयार थे, जिन्हें सनातन परंपरा और मंदिर निर्माण का अच्छा अनुभव था। लेकिन उन्हें ट्रस्ट से अलग कर दिया गया और उनकी जगह “अपने खास लोगों” को ट्रस्ट में शामिल किया गया। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि जब अपने लोगों को ट्रस्ट में रखा जाता है, तो इसका मतलब है कि वे अपने तरीके से काम कर सकें। उन्होंने कहा कि तभी उन्हें अंदाजा हो गया था कि “चोरी होने वाली है।” यह आरोप राम मंदिर ट्रस्ट के गठन और उसके कामकाज पर गंभीर सवाल उठाता है।

गौमाता केवल आस्था का विषय नहीं: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

दरअसल शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का यह दौरा केवल राम मंदिर पर दिए गए बयान तक सीमित नहीं था। वे गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए पूरे प्रदेश में जनजागरण यात्रा चला रहे हैं। बड़ौत के कोताना रोड स्थित सर्व समाज उत्थान समिति के कार्यालय पहुंचने पर लोगों ने पुष्प वर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने गौमाता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि गौमाता केवल आस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और गांवों की अर्थव्यवस्था का भी अहम आधार हैं।

वहीं उन्होंने दावा किया कि इस अभियान के तहत वे अब तक करीब 200 विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों से सीधे बातचीत कर चुके हैं। उनकी अपील है कि इस बार के चुनाव में लोग गौमाता की रक्षा के लिए मतदान करें और सरकारों पर गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने का दबाव बनाएं। इससे साफ है कि शंकराचार्य का यह अभियान धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास है।

Banshika Sharma
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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