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माघ मेले के अनोखे बाबा: गाने सुनाते हैं, सेंट बांटते हैं, ‘सेंट बाबा’ बने आकर्षण का केंद्र

Written by:Bhawna Choubey
Published:
प्रयागराज के माघ मेले में एक अनोखे नागा संन्यासी ने सबका ध्यान खींचा है। ‘सेंट बाबा’ अपने भजनों, अनोखे आशीर्वाद और श्मशान से लाए सेंट के प्रसाद से श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं।
माघ मेले के अनोखे बाबा: गाने सुनाते हैं, सेंट बांटते हैं, ‘सेंट बाबा’ बने आकर्षण का केंद्र

प्रयागराज का माघ मेला हर साल आस्था, साधना और सन्यास की अलग ही तस्वीर दिखाता है। संगम तट पर लगने वाला यह मेला सिर्फ स्नान और पूजा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यहां ऐसे-ऐसे साधु-संत देखने को मिलते हैं, जिनकी जीवनशैली और सोच लोगों को हैरान भी करती है और आकर्षित भी। इस साल माघ मेले में एक ऐसे ही नागा संन्यासी चर्चा का विषय बने हुए हैं, जिन्हें लोग ‘सेंट बाबा’ के नाम से जान रहे हैं।

पूरे शरीर पर भस्म, आंखों पर काला चश्मा, सामने धूनी और हाथ में सेंट से भरा पिटारा सेंट बाबा का अंदाज मेले में आते ही लोगों की नजरों में आ गया। भक्त उनके पास आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं और बाबा अपने अनोखे तरीके से उन्हें सेंट छिड़ककर प्रसाद दे रहे हैं। यही वजह है कि माघ मेले में सेंट बाबा का दरबार खास पहचान बना चुका है।

प्रयागराज माघ मेला 2026: आस्था और अध्यात्म का महासंगम

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हर साल माघ महीने में संगम तट पर भव्य माघ मेला आयोजित होता है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्नान को मोक्षदायी माना जाता है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां कल्पवास, स्नान और दान-पुण्य के लिए पहुंचते हैं। माघ मेले में केवल आम श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि नागा संन्यासी, अखाड़ों के साधु, तपस्वी और गृह त्यागी संत भी बड़ी संख्या में आते हैं। यही कारण है कि यह मेला आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ दिखाई देता है। इस साल भी माघ मेले में कई अनोखे साधु-संत नजर आए, लेकिन ‘सेंट बाबा’ ने अपनी अलग पहचान बना ली।

कौन हैं ‘सेंट बाबा’, जिनकी हर तरफ हो रही चर्चा

माघ मेले में चर्चा में आए सेंट बाबा असल में एक नागा संन्यासी हैं। उनका असली नाम बाबा बालक दास उर्फ नारायण भूमि बताया जाता है। वे श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन से जुड़े हुए हैं और उनका गुरु स्थान पंजाब के अमृतसर में है। सेंट बाबा इस समय माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर दो में अपना शिविर लगाए हुए हैं। पूरे शरीर पर भस्म लगाकर, आंखों पर काला चश्मा पहनकर और धूनी रमाते हुए वे दिनभर साधना में लीन रहते हैं। उनका यह रूप और शांत मुद्रा श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच लेती है।

श्मशान से लाया गया सेंट, अनोखा प्रसाद

सेंट बाबा को सबसे अलग बनाता है उनका आशीर्वाद देने का तरीका। जब कोई श्रद्धालु उनके पास पहुंचता है, तो वे उसके ऊपर सेंट यानी इत्र छिड़कते हैं। बाबा खुद बताते हैं कि यह सेंट वे श्मशान घाट यानी मसान से लाते हैं और इसे प्रसाद के रूप में देते हैं। बाबा का कहना है कि इसी वजह से लोग उन्हें सेंट बाबा कहने लगे। वे जहां भी जाते हैं, अपने साथ सेंट से भरा पिटारा जरूर रखते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह अनुभव बिल्कुल नया होता है, इसलिए लोग दूर-दूर से उनके दर्शन करने आ रहे हैं।

13 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर

सेंट बाबा का जीवन संघर्ष और त्याग की कहानी है। बाबा बताते हैं कि उन्होंने मात्र 13 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था और सन्यास का मार्ग अपना लिया था। आज उन्हें संन्यासी बने हुए करीब 17 साल हो चुके हैं। घर-परिवार, सुख-सुविधा और सांसारिक मोह छोड़कर उन्होंने साधना का रास्ता चुना। बाबा मानते हैं कि सन्यास का अर्थ है डर, लालच और मोह से पूरी तरह मुक्त हो जाना। यही वजह है कि वे श्मशान घाट जैसे स्थानों से भी नहीं डरते और वहां से सेंट लाकर प्रसाद के रूप में बांटते हैं।