स्वामी प्रसाद मौर्य की फिर बढ़ सकती हैं मुश्किलें, ढाई साल पुराने बयान में दर्ज हुआ मुकदमा

ढाई साल पहले श्रीरामचरितमानस पर की गई उनकी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर वाराणसी के कैंट थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
स्वामी प्रसाद मौर्य की फिर बढ़ सकती हैं मुश्किलें, ढाई साल पुराने बयान में दर्ज हुआ मुकदमा

उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। ढाई साल पहले श्रीरामचरितमानस पर की गई उनकी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर वाराणसी के कैंट थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर मंगलवार शाम को की गई। मौर्य ने एक न्यूज़ चैनल के इंटरव्यू में कहा था कि तुलसीदास ने रामचरितमानस अपनी खुशी के लिए लिखा और इसके कुछ अंश आपत्तिजनक हैं, जिन्हें हटाया जाना चाहिए या पुस्तक पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

कैंट थानाध्यक्ष शिवाकांत मिश्रा ने बताया कि मौर्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 504 (जानबूझकर अपमान और उकसाना), 505(2) (धर्म-जाति आधारित शत्रुता को बढ़ावा देना), और 153(ए) (विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह मुकदमा अधिवक्ता अशोक कुमार की याचिका पर दर्ज हुआ, जिन्होंने मौर्य की टिप्पणी को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया। मौर्य ने 22 जनवरी 2023 को दिए इंटरव्यू में रामचरितमानस को लेकर विवादित बयान दिया था, जिसके बाद यह कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।

टिप्पणी से धार्मिक भावनाएं आहत

याचिकाकर्ता अशोक कुमार ने दावा किया कि मौर्य ने रामचरितमानस के कुछ हिस्सों को आपत्तिजनक बताते हुए सरकार से इसे प्रतिबंधित करने की मांग की थी। उनकी इस टिप्पणी से धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। शुरुआत में उनकी याचिका को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया था, लेकिन बाद में निगरानी याचिका दाखिल करने पर 7 अगस्त को कोर्ट ने कैंट थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया।

प्रदेश में सियासी हलकों में भी हलचल

यह मामला स्वामी प्रसाद मौर्य की मुश्किलें बढ़ा सकता है, क्योंकि उनकी टिप्पणी ने पहले भी व्यापक विवाद खड़ा किया था। कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई है। यह घटना एक बार फिर धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को गर्म कर सकती है। मौर्य की टिप्पणी और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई ने उत्तर प्रदेश में सियासी हलकों में भी हलचल मचा दी है।

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