बसपा विधायक के कई ठिकानों पर इनकम टैक्स की रेड, अवैध खनन से 60 करोड़ के राजस्व नुकसान का हुआ खुलासा

उत्तर प्रदेश के बसपा विधायक उमाशंकर सिंह और उनके करीबियों के खिलाफ आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ, बलिया समेत कई जिलों में बुधवार सुबह से चल रही छापेमारी में करोड़ों की टैक्स चोरी का शक है। यह कार्रवाई अवैध खनन से जुड़े आरोपों और एक CAG रिपोर्ट के खुलासे के बाद हुई है, जिसमें सरकार को 60 करोड़ से ज्यादा के राजस्व नुकसान की बात सामने आई थी।
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के विधायक उमाशंकर सिंह और उनके सहयोगियों के कई ठिकानों पर बुधवार सुबह से आयकर विभाग की ताबड़तोड़ छापेमारी चल रही है। यह कार्रवाई लखनऊ, बलिया, सोनभद्र से लेकर प्रयागराज, कौशाम्बी और वाराणसी तक फैली हुई है। पचास से ज्यादा अधिकारियों की टीम इस बड़े ऑपरेशन को अंजाम दे रही है, जिसमें करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी का अनुमान है।

सूत्रों के मुताबिक, अब तक की छापेमारी में टीम को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं। इनमें संपत्तियों, बैंक खातों, लॉकर्स और कंपनियों से जुड़ी विस्तृत जानकारियां शामिल हैं। इसके अलावा, करोड़ों के लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी जब्त कर उनकी मौके पर ही जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, करीब 10 करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने की भी खबर है, हालांकि आयकर विभाग ने अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

CAG रिपोर्ट में हुआ था 60 करोड़ के नुकसान का खुलासा

यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट को माना जा रहा है, जिसमें उमाशंकर सिंह की कंपनी CS इंफ्राकन्सट्रक्शन द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध खनन का खुलासा किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने 33,603 घन मीटर गिट्टी का अवैध खनन किया। इस पर जिला प्रशासन ने पुराने नियमों के तहत केवल 160 रुपये प्रति घन मीटर की दर से रॉयल्टी लगाकर करीब 3.22 करोड़ रुपये की मांग की। लेकिन ऑडिट ने स्पष्ट किया कि अगर नीलामी दर (₹3,000 प्रति घन मीटर) लागू की जाती, तो सरकार को ₹60.48 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलता। इस तरह, पुराने नियमों की आड़ में सरकार को सीधे तौर पर 56 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाया गया। CAG ने इसे अवैध खनन के खिलाफ एक कमजोर दंडात्मक व्यवस्था का बड़ा उदाहरण बताया था।

हर सरकार में फलता-फूलता रहा कारोबार

उमाशंकर सिंह पर पहले भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा कस चुका है और उनके खिलाफ विजिलेंस जांच भी चल रही है। आरोपों के मुताबिक, उन्होंने अवैध खनन के जरिए करोड़ों की काली कमाई की। दिलचस्प बात यह है कि उनका कारोबार हर सरकार में फलता-फूलता रहा।

बसपा सरकार के दौरान वह एक बड़े ठेकेदार थे। विधायक बनने के बाद जब मायावती सरकार चली गई, तब भी समाजवादी पार्टी की सरकार में उनकी कंपनी ‘छात्र शक्ति’ को बड़े ठेके मिलते रहे। योगी सरकार में भी उनका दबदबा कायम रहा और खनन का काम धड़ल्ले से चलता रहा।

सैकड़ों करोड़ की टैक्स चोरी का अनुमान

आयकर विभाग को शक है कि यह मामला सिर्फ 50-60 करोड़ के राजस्व नुकसान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार सैकड़ों करोड़ की टैक्स चोरी से जुड़े हो सकते हैं। यही वजह है कि आईटी टीम ने कई ठिकानों पर डेरा डाल रखा है और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। विभाग द्वारा जल्द ही इस मामले में और बड़े खुलासे किए जाने की उम्मीद है।

Banshika Sharma
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मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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